India Tanker Cross Hormuz: भारत में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच एक गुड न्यूज आई है। मरीन ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, करीब 45 हजार टन LPG सिलेंडर लेकर भारत का एक सुपर टैंकर 'सर्वशक्ति' होर्मुज स्ट्रेट को पार कर गया है। वह जल्द ही भारत पहुंच सकता है। अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान की सख्ती के बीच भारत ने यह कमाल किया है, जिससे पूरी दुनिया हैरान है। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला LPG कैरियर 'MT सर्व शक्ति' 2 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार कर गया।
आधिकारिक सूत्रों ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि इसके 13 मई को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है। जहाज पर 20 क्रू सदस्य सवार हैं। इनमें 18 भारतीय हैं। भारत आ रहा यह जहाज कथित तौर पर 46,313 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) ले जा रहा है। बता दें कि मध्य पूर्व में चल रहे संकट ने दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई को हिलाकर रख दिया है। ईरान तथा US के बीच तनाव के चलते होर्मुज पर भारी दबाव आ गया है।
ऐसे समय में जब दुनिया के सबसे अहम एनर्जी गलियारों में से एक पर भारी दबाव है और सप्लाई चेन बाधित हैं, भारत खाना पकाने के लिए जरूरी ईंधन सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को, भारत से जुड़ा एक सुपरटैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरा। यह वह रास्ता है जहां US द्वारा ईरान से जुड़ी शिपिंग पर नाकेबंदी लगाए जाने के बाद से ट्रैफिक लगभग पूरी तरह से ठप हो गया है।
Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी कंपनी 'इंडियन ऑयल कॉर्प' इस माल की खरीदार है। हालांकि कंपनी ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है। लेकिन जब से मध्य-पूर्व में संघर्ष शुरू हुआ है, तब से दूसरे टैंकर भी भारत के तटों तक पहुंच चुके हैं, तो फिर 'सर्व शक्ति' में क्या ख़ास बात है?
दरअसल, अगर यह टैंकर अपनी यात्रा पूरी कर लेता है, तो यह पहला ऐसा भारतीय जहाज बन जाएगा जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार करेगा। ऐसा तब होगा जब कुछ हफ़्ते पहले US ने ईरान से जुड़े जहाज़ों पर अपनी सख्ती बढ़ा दी थी, जिस वजह से इस अहम गलियारे से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।
इसका Strait of Hormuz से गुजरना ऐसे समय में एक बड़ी सफलता मानी जाएगी, जब ज्यादातर जहाजों ने इस रास्ते से पूरी तरह परहेज किया है। MT Sarv Shakti उन सबसे बड़े कैरियर में से भी एक है, जिसने पिछले महीने जलडमरूमध्य के अराजक रूप से फिर से खुलने के बाद से बाहर निकलने की कोशिश की है। उस समय अनिश्चितता और सैन्य धमकियों के कारण कई जहाज़ों को पीछे हटना पड़ा था।
ईरान युद्ध को शुरू हुए दो माह बीतने के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी लगभग पूरी तरह बंद पड़ा है। यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या युद्ध-पूर्व की स्थिति के मुकाबले बेहद कम रह गई है। यही नहीं, 28 फरवरी से अब तक सीजफायर, नाकेबंदी और इसके फिर से बंद होने का जो दौर चला, उनसे टैंकर संचालकों का भरोसा बहाल नहीं हो सका है। होर्मुज को लंबे समय से दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक गलियारों में से एक माना जाता रहा है