मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के सामने पैदा हुई "कठिन परिस्थितियों" पर उसके प्रति सहानुभूति जताई है। ये बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिनों पहले इस्लामाबाद समर्थित आतंकवादियों जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक कायराना हमले को अंजाम दिया, जिसमें 26 नागरिकों को जान चली गई, जिनमें ज्यादातर टूरिस्ट थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ टेलीफोन पर बातचीत में इब्राहिम ने कहा कि मलेशिया इस घातक हमले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच का समर्थन करता है।
उन्होंने जम्मू और कश्मीर को 'भारत प्रशासित कश्मीर' भी कहा - एक ऐसा शब्द जिसकी पहले मलेशियाई भारतीय पीपुल्स पार्टी (MIPP) ने आलोचना की थी, जो मलेशिया में एक राष्ट्रवादी जातीय भारतीय राजनीतिक समूह है।
उन्होंने तटस्थता दिखाने के लिए अपने बयान को संतुलित करने की कोशिश करते हुए कहा, "अगर जरूरत पड़ी तो मलेशिया रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। हमारा मानना है कि पाकिस्तान और भारत दोनों के साथ हमारे घनिष्ठ संबंध हमें क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में कोशिशों का समर्थन करने की स्थिति में रखते हैं।"
मलेशिया, एक मुस्लिम बहुल देश है, जिसने जम्मू-कश्मीर पर कई बार विवादित बयान दिए हैं, जिस पर अक्सर नई दिल्ली की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। भारत और मलेशिया के बीच संबंध 2019 में तब खराब हो गए थे, जब मलेशिया ने कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के लिए अनुच्छेद 370 को खत्म करने के लिए नई दिल्ली की आलोचना की थी।
इस बीच, शरीफ ने पहलगाम आतंकी हमले से अपने देश को जोड़ने के किसी भी कोशिश को “साफतौर से” खारिज कर दिया। रेडियो पाकिस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार, शरीफ ने दक्षिण एशिया में मौजूदा तनाव पर पाकिस्तान की चिंताओं के बारे में बात की।
उन्होंने पहलगाम घटना के बाद भारत के "उकसाने वाले व्यवहार" पर भी चिंता जताई। प्रधानमंत्री मोदी और दूसरे केंद्रीय मंत्रियों ने पहलगाम हमले का कड़ा जवाब देने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमलावरों का "धरती के छोर तक" पीछा करेगा।
पिछले महीने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते और भी खराब हो गए थे। इस हमले में 26 नागरिक मारे गए थे। पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के एक संगठन द रेजिस्टेंस फोर्स (TRF) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।