डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों का वीजा अचानक रद्द कर दिया। इसके खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। भारत और चीन के पांच छात्रों ने अमेरिका की डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और अन्य इमिग्रेशन अधिकारियों के खिलाफ न्यू हैम्पशायर की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। यह केस प्रतिष्ठित नागरिक अधिकार संगठन अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) की ओर से दाखिल किया गया।
छात्रों का आरोप है कि उनकी F-1 स्टूडेंट वीजा स्थिति को बिना किसी पूर्व चेतावनी या कानूनी प्रक्रिया के अचानक समाप्त कर दिया गया। इससे वे अब अमेरिका में अवैध रूप से रहने को मजबूर हैं और पढ़ाई बीच में ही छोड़ने की नौबत आ गई है।
भारत और चीन के छात्र बने अगुआ
मुकदमा दायर करने वाले 5 छात्रों में से तीन भारतीय हैं- लिंकिथ बाबू गोरेला, थानुज कुमार गुम्माडावेली, मणिकंता पसुला। वहीं, दो चाइनीज स्टूडेंट हैं- हैंगरुई झांग और हाओयांग एन। इन छात्रों ने कहा है कि उन्होंने अमेरिकी वीजा नियमों का पूरी तरह पालन किया है, उनकी एकेडमिक स्थिति अच्छी है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसके बावजूद DHS ने बिना उचित प्रक्रिया के उनके वीजा रद्द कर दिए।
करियर और शिक्षा पर संकट
भारतीय छात्र लिंकिथ बाबू गोरेला अमेरिका में मास्टर्स प्रोग्राम में हैं। उनका कहना है कि वीजा रद्द होने के कारण अब वे 20 मई को डिग्री नहीं ले पाएंगे। वह OPT (Optional Practical Training) के लिए आवेदन भी नहीं कर सकते हैं, जो छात्रों को पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है।
अन्य भारतीय छात्र जिनकी पढ़ाई का आखिरी सेमेस्टर चल रहा है, उन्होंने भी OPT और करियर को लेकर गंभीर चिंता जताई है। वहीं, चीनी छात्र हैंगरुई झांग ने अपनी रिसर्च असिस्टेंटशिप खो दी है, जो उनकी मुख्य आय का स्रोत थी। हाओयांग एन ने दावा किया है कि वे अब तक $3.29 लाख (लगभग ₹2.7 करोड़) खर्च कर चुके हैं और अब पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ सकती है।
कोर्ट से छात्रों की क्या मांग है?
ACLU ने कोर्ट से अपील की है कि इन छात्रों की F-1 वीजा स्थिति को तत्काल बहाल किया जाए ताकि वे डिटेंशन या डिपोर्टेशन जैसे गंभीर स्थिति से बच सकें और अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।
मामला क्यों है अहम?
इस मुकदमे का असर केवल पांच छात्रों पर नहीं, बल्कि उन हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर भी पड़ेगा, जिनकी वीजा स्थिति इसी तरह बिना चेतावनी समाप्त कर दी गई है। अगर कोर्ट ने छात्रों के पक्ष में फैसला दिया, तो यह एक मिसाल बन सकता है। इससे हजारों छात्रों को राहत मिल सकती है।
अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कुल संख्या 10 लाख से अधिक है। इनमें बड़ी संख्या भारतीय और चीनी छात्रों की है। ये छात्र अमेरिकी यूनिवर्सिटीज और इकोनॉमी के लिए भी अहम योगदान करते हैं।
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