'अमेरिकी-जायोनी दुश्मन पस्त, हमारी जीत पूरी! ईरान ने भी कर दिया डील का ऐलान, पाकिस्तान-कतर को बोला 'थैंक यू'
US Iran Peace Deal: तेहरान ने साफ कर दिया है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध और मिलिट्री ऑपरेशन्स को आज रात से ही हमेशा के लिए खत्म किया जा रहा है और उनके ऊपर लगी नौसैनिक ब्लॉकेड भी हटा ली गई है। लेकिन इस 'शांति' के पीछे ईरान ने अमेरिका को जो अल्टीमेटम दिया है, उसने शुक्रवार को होने वाली साइनिंग से पहले ही वाशिंगटन की धड़कनें बढ़ा दी हैं
लेटर में ईरान ने बेहद आक्रामक लहजे में ऐलान किया है कि, 'अपने शहीद नेता के नेतृत्व में US और जायोनी दुश्मन पर अपनी जीत पूरी कर ली है'
Iran on US-Iran Peace Deal: मिडिल ईस्ट से इस वक्त की एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का एक बेहद सीक्रेट आधिकारिक पत्र लीक हुआ है, जिसने पूरी दुनिया के सुरक्षा विश्लेषकों को सन्न कर दिया है। इस पत्र में ईरान ने बेहद आक्रामक और विजयी लहजे में ऐलान किया है कि 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने अपने शहीद नेता के नेतृत्व में अमेरिकी और जायोनी दुश्मन यानी इजरायल पर अपनी सफलता पूरी कर ली है'।
तेहरान ने साफ कर दिया है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध और मिलिट्री ऑपरेशन्स को आज रात से ही हमेशा के लिए खत्म किया जा रहा है और उनके ऊपर लगी नौसैनिक ब्लॉकेड भी हटा ली गई है। लेकिन इस 'शांति' के पीछे ईरान ने अमेरिका को जो अल्टीमेटम दिया है, उसने शुक्रवार को होने वाली साइनिंग से पहले ही वाशिंगटन की धड़कनें बढ़ा दी हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि ईरान के इस आधिकारिक बयान के मायने क्या हैं और आगे खेल कहां फंस सकता है।
ईरान का बड़ा दावा- 'दुश्मन पस्त, हमारी जीत पूरी'
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल द्वारा जारी इस आधिकारिक लेटर की भाषा सामान्य शांति समझौतों जैसी बिल्कुल नहीं है। इसमें डिप्लोमेसी से ज्यादा 'जीत के जश्न' का मिजाज साफ झलकता है। ईरानने इस पूरी सफलता का श्रेय अपने शहीद नेता के मार्गदर्शन और लड़ाकों के कड़े संघर्ष को दिया है।
लेटर में अमेरिका और इजरायल को सीधे तौर पर 'अमेरिकी-जायोनी दुश्मन' संबोधित किया गया है। ईरान का दावा है कि महीनों के कड़े प्रतिरोध के बाद उसने इस दुश्मन पर अपनी रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है।
लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्धविराम का ऐलान
इस लेटर के जरिए ईरान ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है कि युद्धविराम सिर्फ कुछ चुनिंदा इलाकों में होगा। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि लेबनान फ्रंट समेत सभी एक्टिव मोर्चों पर सैन्य अभियान आज रात से 'तुरंत और हमेशा के लिए' बंद किए जा रहे हैं। ईरान का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल सप्लाई को रोकने वाली अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है।
19 जून को फाइनल डील पर लगेगी मुहर
ईरान ने इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच तैयार किए गए ऑफिशियल मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर आगामी शुक्रवार, 19 जून को हस्ताक्षर किए जाएंगे। लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी शर्त भी जोड़ दी गई है।
ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह समझौता तभी फाइनल और कामयाब माना जाएगा, जब अमेरिका टेबल पर बैठकर किए गए अपने वादों और प्रतिबद्धताओं जैसे- फ्रीज फंड्स की रिहाई और प्रतिबंधों में ढील को पूरी तरह और ईमानदारी से पूरा करेगा। अगर अमेरिका मुकरा, तो ईरान भी पीछे हट सकता है।
पाकिस्तान और कतर को तेहरान का 'थैंक यू'
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध को टालने और अमेरिका-ईरान को एक टेबल पर लाने में परदे के पीछे किस देश ने क्या भूमिका निभाई, इसका खुलासा भी इस पत्र में हुआ है।
ईरान ने इस पूरे विवाद को सुलझाने और मध्यस्थता के थका देने वाले दौर को अंजाम तक पहुंचाने के लिए इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान और कतर सरकार के प्रयासों की आधिकारिक तौर पर सराहना की है और उनका शुक्रिया अदा किया है।
क्या वाकई शांति आएगी?
ईरान के इस आधिकारिक रुख ने साफ कर दिया है कि वह इस समझौते को अपनी मजबूरी नहीं, बल्कि अपनी 'जीत' के रूप में पेश कर रहा है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए वाशिंगटन में डोमेस्टिक प्रेशर संभालना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि विपक्ष उन पर ईरान के आगे घुटने टेकने का आरोप लगाएगा।
इसके अलावा, इजरायल इस समझौते को 'बैड डील' मानकर पहले ही खारिज कर चुका है। ऐसे में 19 जून को होने वाले हस्ताक्षर सिर्फ 60 दिनों का एक अस्थायी 'पॉज बटन' साबित हो सकते हैं, जिसके बाद अगर अमेरिका ने ईरान की शर्तें नहीं मानीं, तो बारूद के ढेर पर बैठे मिडिल ईस्ट में इससे भी बड़ा धमाका हो सकता है।