ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार बताए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह जानकारी इजरायली अखबार Yedioth Ahronoth ने दी है, जिसमें कहा गया है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका के मध्यस्थ स्टीव विटकॉफ के बीच बातचीत हुई, जिसे तेहरान के शीर्ष स्तर पर मंजूरी मिली थी।
यह खबर बताती है कि अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल बातचीत अब शुरुआती दौर से आगे बढ़ रही है। हालांकि, यह दावा ईरान के विदेश मंत्रालय के उस बयान के उलट है, जिसमें कहा गया था कि 24 दिनों तक चले अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान वॉशिंगटन से कोई बातचीत नहीं हुई।
गौरतलब है कि मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अली खामेनेई की मौत के बाद यह पद संभाला, जिनकी 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में मौत हो गई थी।
वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच “अच्छी और सकारात्मक बातचीत” हुई है। उन्होंने इसे गहराई से हुई और रचनात्मक चर्चा बताया।
ट्रंप ने यह भी कहा कि बातचीत के माहौल को देखते हुए ईरान के पावर प्लांट और ऊर्जा ठिकानों पर हमले 5 दिन के लिए रोक दिए गए हैं।
साथ ही उन्होंने यह भी इशारा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुद जल्द ही फिर से खुल सकता है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि भविष्य में इस अहम जलमार्ग को अमेरिका और ईरान मिलकर मैनेज कर सकते हैं।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से सामान्य समय में रोज़ाना करीब 2 करोड़ बैरल (कच्चा तेल और अन्य तेल उत्पाद) गुजरते हैं, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25% है। इसलिए यहां की स्थिति पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम मानी जाती है।
ईरान ने ट्रंप के दावे को बताया 'फेक न्यूज'
दूसरी तरफ इजरायल के बीचों-बीच रात में हुए ईरानी हमलों में कम से कम 6 लोग घायल हो गए।
इसी बीच, ईरान ने डोनाल्ड के उस दावे को “फेक न्यूज़” बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। इससे युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीदों को झटका लगा है।
सोमवार को ट्रंप ने अपने उस बयान से पीछे हटते हुए, जिसमें उन्होंने ईरान के पावर प्लांट्स को “तबाह” करने की बात कही थी, कहा कि ईरानी अधिकारियों के साथ “बहुत अच्छी” बातचीत हुई है। साथ ही उन्होंने ईरान को 5 दिन का समय दिया है कि वह अहम समुद्री रास्ते होर्मुज को फिर से खोल दे।
वहीं, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद कलिबफ ने साफ कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है और ट्रंप के दावों को “फेक न्यूज” बताया।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि दोनों देशों के बीच बयानबाजी जारी है और हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।