कौन हैं रेजा पहलवी, ईरान के निर्वासित युवराज की एक अपील से कांपा खामेनेई शासन!
Iran Protests: ईरान पर 50 सालों से ज्यादा समय तक शासन करने वाले पहलवी राजवंश के वंशज, रेजा पहलवी ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रेजा पहलवी और महारानी फराह दीबा के बेटे हैं। उनका जन्म 31 अक्टूबर 1960 को हुआ था और 1967 में अपने पिता के राज्याभिषेक के समय उन्हें आधिकारिक तौर पर युवराज घोषित किया गया था
Iran Protests: कौन हैं रेजा पहलवी, ईरान के निर्वासित युवराज की एक अपील से कांपा खामेनेई शासन!
पिछले महीने आर्थिक मंदी के कारण ईरान में तेजी से अशांति फैल गई। आलम ये है कि लोग सड़कों पर उतार आए, विरोध प्रदर्शन करने वालों ने सरकार टीवी चैनल को भी आग लगा दी और इस्लामिक सरकार को देश में इंटरनेट सर्विस बंद करनी पड़ी। इन विरोध प्रदर्शन के रातोंरात इतनी तेजी फैलने के पीछे ईरान के निर्वासित युवराज रेजा पहलवी का नाम आ रहा है। रेजा की अपील के बाद गुरुवार रात को तेहरान और मशहद जैसे बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए, क्योंकि भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए।
एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और शुक्रवार सुबह तक सड़कों पर मार्च किया। जैसे-जैसे आंदोलन तेज होता गया, गुरुवार को प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और ईरान के धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ नारे लगाने लगे।
प्रदर्शनकारियों को इस्लामिक के खिलाफ नारे दोहराते हुए देखा गया, जिनमें "पहलावी की वापसी होगी" और "सैय्यद अली को सत्ता से हटाया जाएगा" जैसे नारे शामिल थे, जो ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को लेकर लगाए गए थे।
रेजा पहलवी कौन हैं?
ईरान पर 50 सालों से ज्यादा समय तक शासन करने वाले पहलवी राजवंश के वंशज, रेजा पहलवी ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रेजा पहलवी और महारानी फराह दीबा के बेटे हैं। उनका जन्म 31 अक्टूबर 1960 को हुआ था और 1967 में अपने पिता के राज्याभिषेक के समय उन्हें आधिकारिक तौर पर युवराज घोषित किया गया था।
महल के अंदर ही बने एक प्राइवेट स्कूल में शुरुआती शिक्षा हासिल करने के बाद, रेजा ने 1978 में टेक्सास के लुबॉक में रीस एयर फोर्स बेस में US एयर फोर्स में जेट फाइटर ट्रेनिंग के लिए चले गए।
कुछ महीनों बाद इस्लामी क्रांति में पहलवी राजवंश और ईरान की राजशाही का तख्तापलट हो गया। ईरान में धर्मतंत्र स्थापित होने से पहले ही पहलवी परिवार देश छोड़कर भाग गया था और रुहोल्लाह खामेनेई ने ईरान के नेता के रूप में पदभार संभाला।
इन घटनाक्रमों के चलते रेजा और पहलवी परिवार के बाकी सदस्यों के लिए भी ईरान लौटना असंभव हो गया।
रेजा ने दक्षिणी कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में डिग्री प्राप्त की थी। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान फाइटर पायलट के रूप में ईरान की सेना में सेवा देने की पेशकश भी की थी। हालांकि, इस्लामिक सरकार ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी।
रेजा की वेबसाइट उन्हें 'धर्मनिरपेक्ष ईरान के पैरोकार' और 'अपने देशवासियों के लिए स्वतंत्रता, लोकतंत्र और मानवाधिकारों के सिद्धांतों के समर्थक' बताती है।
उनकी वेबसाइट के अनुसार, रेजा ने ईरान पर तीन किताबें भी लिखी हैं। ये पुस्तकें हैं: गोज़श्तेह वा अयांदेह, बदलाव की हवाएं: ईरान में लोकतंत्र का भविष्य और ईरान: निर्णायक घड़ी।
रेजा के एक वीडियो से तेज हुए प्रदर्शन!
ईरान के पूर्व शाह के बेटे रेजा पहलवी ने X पर एक वीडियो मैसेज जारी कर गुरुवार और शुक्रवार रात 8 बजे सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। इसी अपील ने प्रदर्शनों को नई ताकत दी और देशभर में बड़ी भीड़ इकट्ठा हो गई।
तेहरान के इलाकों में शाम 8 बजते ही गली-मोहल्लों से नारे गूंजने लगे। गवाहों के मुताबिक, प्रदर्शनकारी चिल्ला रहे थे- "तानाशाह को मौत!" और "इस्लामिक गणराज्य को मौत!" कुछ लोग पुरानी राजशाही के समर्थन में चिल्ला रहे थे- "ये आखिरी जंग है! पहलवी लौटेगा!" इंटर बंद होने से पहले हजारों लोग सड़कों पर दिखे।
रेजा पहलवी ने कहा, "ईरानियों ने आज रात आजादी मांगी। जवाब में सरकार ने सारी संचार लाइनें काट दीं। इंटरनेट बंद कर दिया, लैंडलाइन काट दीं। शायद सैटेलाइट सिग्नल भी जाम करने की कोशिश करें।" उन्होंने कहा कि लोगों के जवाब के आधार पर आगे की योजना बताएंगे।
लोग निर्वासित राजकुमार की तारीफ कर रहे थे और चिल्ला रहे थे - "ये आखिरी जंग है! पहलवी लौटेगा!" कुछ प्रदर्शनकारियों ने शाह के समर्थन में नारे लगाए, लेकिन साफ नहीं कि ये रेजा पहलवी के पक्ष में हैं या 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले के समय की चाहत। पहलवी का और इजरायल का समर्थन पहले विवादों में रहा, खासकर जून में इसराइल-ईरान युद्ध के बाद।