Ali Larijani: 'हम कतई बातचीत नहीं करेंगे...', ट्रंप के दावे पर अली लारीजानी का पलटवार; ईरान-अमेरिका में ठनी!

US Israel-Iran News: राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बयान में संकेत दिया था कि ईरानी नेतृत्व अब नरम पड़ रहा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के जीवित बचे और नए नियुक्त नेताओं ने उनसे संपर्क किया है और वे 'बात करना चाहते हैं'। ट्रंप ने अपनी सहमति देते हुए कहा, 'मैं उनसे बात करूंगा'

अपडेटेड Mar 02, 2026 पर 11:26 AM
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अली लारीजानी ने कहा ट्रंप ने अपनी 'झूठी उम्मीदों' से पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है और अब वे अमेरिकी सैनिकों की जान जाने के डर से घबराए हुए हैं

US-Iran Conflict: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब कूटनीतिक गतिरोध में बदल गया है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि ईरान का नया नेतृत्व उनसे संपर्क कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने किसी भी तरह की बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है।

'ईरान अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा'

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक, अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर ट्रंप के दावों पर कड़ा प्रहार किया। लारीजानी ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि तेहरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका से बातचीत की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने अपनी 'झूठी उम्मीदों' से पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है और अब वे अमेरिकी सैनिकों की जान जाने के डर से घबराए हुए हैं। लारीजानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ईरान अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा।'


डोनाल्ड ट्रंप का 'संपर्क' वाला दावा

इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बयान में संकेत दिया था कि ईरानी नेतृत्व अब नरम पड़ रहा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के जीवित बचे और नए नियुक्त नेताओं ने उनसे संपर्क किया है और वे 'बात करना चाहते हैं'। ट्रंप ने अपनी सहमति देते हुए कहा, 'मैं उनसे बात करूंगा।' ट्रंप ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि ईरान को यह कदम बहुत पहले उठाना चाहिए था, उनके पहले के फैसले बहुत देरी से लिए गए थे। हालांकि, ट्रंप ने बातचीत के लिए कोई तारीख या समय तय नहीं किया है।

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मध्यस्थों की भूमिका पर सस्पेंस

भले ही ईरान आधिकारिक तौर पर बातचीत से इनकार कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ऐसी खबरें हैं कि ईरान ने गुपचुप तरीके से कुछ देशों के जरिए अमेरिका तक संदेश पहुंचाया है। ट्रंप का दावा इसी आधार पर है, लेकिन ईरान का नेतृत्व फिलहाल अपनी जनता के सामने कमजोर नहीं दिखना चाहता, इसलिए वह 'बदला' लेने की अपनी पुरानी रट पर कायम है।

क्षेत्र में अशांति का माहौल

इस जुबानी जंग के बीच युद्ध का खतरा टला नहीं है। ईरान का कहना है कि वह बातचीत की मेज पर तभी आएगा जब उसकी संप्रभुता का सम्मान होगा और हमले रुकेंगे। वहीं अमेरिका का मानना है कि उसने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के जरिए ईरान की ताकत को सीमित कर दिया है और अब वह अपनी शर्तों पर शांति समझौता चाहता है।

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