Iran Demands: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को रोकने के लिए अमेरिका की ओर से भेजे गए '15-सूत्रीय फॉर्मूले' पर ईरान का पहला रिएक्शन आ गया है। 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने युद्धविराम के बदले ऐसी शर्तें रखी हैं जिन्हें अमेरिकी अधिकारियों ने 'हास्यास्पद और अव्यावहारिक' करार दिया है। ईरान की इन शर्तों के पीछे वहां की शक्तिशाली 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) का हाथ माना जा रहा है।
क्या है ईरान की प्रमुख मांगें?
ईरान ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों को देखते हुए अपनी शर्तों की एक लंबी लिस्ट पेश की है:
अमेरिकी सैन्य अड्डों की बंदी: ईरान की सबसे बड़ी मांग है कि फारस की खाड़ी में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद किया जाए और वहां से अमेरिकी सेना की पूरी तरह विदाई हो।
युद्ध का हर्जाना: ईरान ने अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों से हुए नुकसान की भरपाई के लिए भारी वित्तीय मुआवजे की मांग की है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर 'टैक्स': ईरान चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को स्वेज नहर की तरह एक नया फ्रेमवर्क दिया जाए, जिससे वह वहां से गुजरने वाले जहाजों से 'पासिंग फीस' वसूल सके।
पाबंदियों और मिसाइल कार्यक्रम: सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए और ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी तरह की बातचीत या सीमा तय न की जाए।
इजरायली हमलों पर रोक: लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह पर इजरायल के हमलों को तुरंत बंद करने की गारंटी दी जाए।
ट्रंप के 'शांति प्रस्ताव' में क्या है?
एक तरफ जहां ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान और अन्य मध्यस्थों के जरिए जो प्रस्ताव भेजा है, उसकी मुख्य शर्तें ये हैं:
परमाणु कार्यक्रम का अंत: ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म करना होगा और 60% संवर्धित यूरेनियम IAEA को सौंपना होगा।
ठिकानों को नष्ट करना: नतांज, इस्फहान और फोर्डो जैसे परमाणु केंद्रों को नष्ट करना होगा।
होर्मुज का रास्ता: होर्मुज जलडमरूमध्य को हमेशा के लिए एक स्वतंत्र समुद्री मार्ग के रूप में खुला रखना होगा।
प्रॉक्सी नेटवर्क: ईरान को क्षेत्रीय विद्रोही समूहों को फंडिंग और हथियार देना बंद करना होगा।
शांति वार्ता की खबरों के बीच जमीन पर अभी भी तनाव कम नहीं हुआ है। अमेरिका अपनी '82nd एयरबोर्न डिवीजन' के 3,000 अतिरिक्त सैनिकों को मिडिल ईस्ट में तैनात करने की तैयारी कर रहा है। इजरायल ने भी ईरान में 'हवाई हमलों की एक बड़ी लहर' शुरू की है और लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर अपने ऑपरेशन का विस्तार किया है। वहीं, ईरानी मिसाइल हमलों में इजरायल में भी कई लोग घायल हुए हैं।