Iran Allow Pakistani Ships: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और समुद्री नाकेबंदी के बीच पाकिस्तान को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। ईरान ने पाकिस्तानी झंडे वाले 20 जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है। पाकिस्तान अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो अपने जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित करने में कामयाब रहे हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस रास्ते से होने वाला व्यापार लगभग 90% तक ठप पड़ा है। आज से ही अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर इस्लामाबाद में बैठक भी होने वाली है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सोशल मीडिया 'X' पर इस विशेष व्यवस्था की जानकारी दी। ईरान हर दिन पाकिस्तान के दो जहाजों को इस रास्ते से गुजरने देगा। कुल 20 जहाजों को यह 'सेफ पैसेज' मिला है। डार ने इसे ईरान का एक सकारात्मक कदम बताया और कहा कि यह क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा संकेत है। इस घोषणा के दौरान डार ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची को टैग किया, जो इस समझौते की वैश्विक अहमियत को दर्शाता है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता का असर
यह राहत पाकिस्तान की पिछले एक हफ्ते की सक्रिय कूटनीति का नतीजा मानी जा रही है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ चर्चा की थी। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने पुष्टि की है कि इस्लामाबाद, वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत का जरिया बना हुआ है।
होर्मुज में 'लॉकडाउन' जैसे हालात
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति बेहद खराब है। सामान्य दिनों के मुकाबले समुद्री यातायात में 90% की गिरावट आई है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक मात्र 150 जहाज ही यहां से गुजर पाए हैं। करीब 2,000 जहाज रास्ते के दोनों तरफ खड़े हैं, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। फिलहाल ईरान की सेना IRGC ने यहां कड़ा नियंत्रण कर रखा है। जहाजों को गुजरने के लिए अपना सारा डेटा देना पड़ रहा है और ईरानी एस्कॉर्ट के साथ ही आगे बढ़ना है।
करोड़ों का 'टोल टैक्स' और नई व्यवस्था
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस रास्ते से गुजरना अब बेहद महंगा और जटिल हो गया है। कुछ जहाजों ने एक बार गुजरने के लिए 20 लाख डॉलर यानी करीब ₹16 करोड़ से ज्यादा तक का भुगतान किया है। खास बात यह है कि ये लेनदेन चीनी मुद्रा 'युआन' में किए जा रहे है। ईरानी संसद अब इसे एक औपचारिक 'टोल टैक्स' कानून बनाने पर विचार कर रही है।