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'ब्रिक्स को अमेरिका-इजरायल के खिलाफ लामबंद करें भारत', ईरान के भारी दवाब के बावजूद नई दिल्ली क्यों बना रहा है दूरी? जानिए

BRICS Statement Iran Conflict: भारत फिलहाल इस मामले में एक बेहद कठिन कूटनीतिक संकट में उलझा हुआ है। भारत का मानना है कि ब्रिक्स अध्यक्ष होने के नाते वह किसी एक का पक्ष नहीं ले सकता। उसका काम सदस्यों के बीच बातचीत को आसान बनाना है, न कि किसी के खिलाफ मोर्चा खोलना

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Mar 26, 2026 पर 9:08 AM
'ब्रिक्स को अमेरिका-इजरायल के खिलाफ लामबंद करें भारत', ईरान के भारी दवाब के बावजूद नई दिल्ली क्यों बना रहा है दूरी? जानिए
भारत ने अब तक ईरान की इस मांग से दूरी बनाई हुई है, जिससे ब्रिक्स समूह के भीतर की गहरी दरारें सामने आ रही है

Iran-BRICS: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत एक बड़ी कूटनीतिक अग्निपरीक्षा से गुजर रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने भारत से अपील की है कि वह BRICS देशों के अध्यक्ष के रूप में अपनी ताकत का इस्तेमाल करे और अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियानों की निंदा कराए। हालांकि, भारत ने अब तक ईरान की इस मांग से दूरी बनाई हुई है, जिससे ब्रिक्स समूह के भीतर की गहरी दरारें सामने आ रही है।

ईरान की मांग और BRICS में 'डेडलॉक'

2024 में ब्रिक्स का हिस्सा बना ईरान इस मंच का इस्तेमाल अपनी सुरक्षा के लिए करना चाहता है। दरअसल ईरान चाहता है कि ब्रिक्स एक साझा बयान जारी कर अमेरिका और इजरायल के हमलों की कड़ी आलोचना करे। रिपोर्ट के मुताबिक, समूह के भीतर अब तक तीन ड्राफ्ट पेश किए गए हैं। दो कड़े बयानों को आपसी मतभेदों के कारण खारिज कर दिया गया, जबकि एक तटस्थ बयान पर अभी चर्चा जारी है। जहां चीन और रूस, ईरान का समर्थन कर सकते हैं, वहीं संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देश अमेरिका के खिलाफ जाने के मूड में नहीं हैं।

भारत क्यों है खामोश?

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