दुबई पोर्ट पर खड़े कुवैती तेल टैंकर पर ईरानी हमले से लगी भीषण आग, बचा लिए गए सभी क्रू सदस्य; खाड़ी में चरम पर तनाव

Iran Drone Attack: हमला दुबई पोर्ट के एंकरेज एरिया यानी जहां जहाज लंगर डालते हैं वहां हुआ। ब्रिटिश सैन्य इकाई UKMTO के अनुसार, टैंकर दुबई से लगभग 31 समुद्री मील उत्तर-पश्चिम में था जब उसे निशाना बनाया गया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक 'सुसाइड ड्रोन' टैंकर के दाईं ओर टकराया, जिससे वहां भीषण आग लग गई

अपडेटेड Mar 31, 2026 पर 7:42 AM
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कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने एक साथ कई 'मिसाइल और ड्रोन हमलों' को नाकाम किया

Iranian Strike: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच अभी भी टकराव जारी है। दोनों तरफ से लगातार छिटपुट हमले हो रहे है। ऐसे ही दुबई के तट पर खड़े एक विशाल कुवैती तेल टैंकर पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। हालांकि, राहत की बात यह है कि टैंकर पर मौजूद सभी 24 क्रू सदस्य सुरक्षित बचा लिए गए हैं, लेकिन इस घटना ने पहले से ही अशांत खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।

दुबई पोर्ट पर जहाज को 'ड्रोन' से बनाया निशाना

कुवैत की सरकारी समाचार एजेंसी (KUNA) के अनुसार, यह एक 'प्रत्यक्ष और दुर्भावनापूर्ण' हमला था। हमला दुबई पोर्ट के एंकरेज एरिया यानी जहां जहाज लंगर डालते हैं वहां हुआ। ब्रिटिश सैन्य इकाई UKMTO के अनुसार, टैंकर दुबई से लगभग 31 समुद्री मील उत्तर-पश्चिम में था जब उसे निशाना बनाया गया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक 'सुसाइड ड्रोन' टैंकर के दाईं ओर टकराया, जिससे वहां आग लग गई। दुबई मीडिया ऑफिस ने पुष्टि की है कि आपातकालीन टीमें आग पर काबू पाने में जुटी हैं और किसी भी क्रू सदस्य को चोट नहीं आई है।


केवल जहाज नहीं, मिसाइल हमले भी हुए: कुवैत

यह हमला केवल एक समुद्री घटना तक सीमित नहीं था। कुवैती सेना ने एक बड़ा खुलासा किया है। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया 'X' पर जानकारी दी कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने एक साथ कई 'मिसाइल और ड्रोन हमलों' को नाकाम किया है। इस बात से ये साफ है कि ईरान ने केवल एक टैंकर को नहीं, बल्कि क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को भी एक साथ निशाना बनाने की कोशिश की है।

युद्ध की जद में प्रमुख शिपिंग रूट

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास इस तरह के हमले वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। दुबई जैसे व्यस्त बंदरगाह के पास हमला होना यह दर्शाता है कि अब खाड़ी के सुरक्षित समझे जाने वाले इलाके भी युद्ध की जद में हैं। UKMTO के अनुसार, फिलहाल समुद्र में तेल रिसाव जैसी कोई पर्यावरणीय क्षति नहीं देखी गई है, लेकिन स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

ऊर्जा बाजार में मचेगी खलबली?

ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच कुवैती टैंकर पर यह हमला तेल की कीमतों को एक बार फिर आसमान पर पहुंचा सकता है। कुवैत दुनिया के बड़े तेल उत्पादकों में से एक है। उसके टैंकर पर हमले का मतलब है कि अब खाड़ी देशों के तेल निर्यात पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। समुद्री अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इस घटना के बाद जहाजों की आवाजाही को लेकर नई एडवाइजरी जारी कर सकती हैं।

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