ट्रंप की बेटी इवांका को मारने की तैयारी में था ये 32 साल का ईरानी शख्स, सबसे बड़ा बदला चुकाने की प्लानिंग में पकड़ाया, कौन था ये?

Ivanka Trump Murder Planning: रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद अल-सादी ईरान के सबसे ताकतवर और दिवंगत सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए इवांका ट्रंप को मौत के घाट उतारना चाहता था। वह लोगों से कहता था, 'हमें ट्रंप के घर को उसी तरह जलाने के लिए इवांका को मारना होगा, जिस तरह उसने हमारे घर को उजाड़ा है'

अपडेटेड May 23, 2026 पर 2:14 PM
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इवांका ट्रंप की हत्या की साजिश रचने वाले इस हाई-प्रोफाइल आरोपी की पहचान मोहम्मद अल-सादी के रूप में हुई है

Ivanka Trump: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों के बीच एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश को नाकाम कर दिया गया है। ईरान की खतरनाक सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) से जुड़े एक 32 साल के शख्स को इवांका ट्रंप की हत्या का ब्लूप्रिंट तैयार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

अमेरिकी अखबार 'न्यूयॉक पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, यह आरोपी ईरान के सबसे ताकतवर और दिवंगत सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए इवांका ट्रंप को मौत के घाट उतारना चाहता था।

कौन है यह आरोपी मोहम्मद अल-सादी?


इवांका ट्रंप की हत्या की साजिश रचने वाले इस हाई-प्रोफाइल आरोपी की पहचान मोहम्मद बकीर साद दाऊद अल-सादी के रूप में हुई है। अल-सादी के अपने पिता की 2006 में मौत के बाद, कासिम सुलेमानी ने ही उसे संभाला था। अल-सादी सुलेमानी को अपने पिता की तरह मानता था।

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6 साल पहले जब अमेरिका ने बगदाद में एक ड्रोन हमले में कासिम सुलेमानी को मार गिराया, तो अल-सादी ने कसम खाई थी। वह लोगों से कहता था, 'हमें ट्रंप के घर को उसी तरह जलाने के लिए इवांका को मारना होगा, जिस तरह उसने हमारे घर को उजाड़ा है।'

इवांका के फ्लोरिडा वाले घर का था पूरा नक्शा, सोशल मीडिया पर दी थी धमकी

जांच में सामने आया है कि अल-सादी ने इवांका ट्रंप और उनके पति जेरेड कुशनर के फ्लोरिडा स्थित आलीशान घर का पूरा नक्शा और ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया था। उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फ्लोरिडा के उस इलाके का नक्शा पोस्ट किया था जहां इवांका रहती हैं।

उसने अरबी भाषा में एक धमकी भरा मैसेज लिखा था, 'मैं अमेरिकियों से कहता हूं कि इस तस्वीर को देखें और जान लें कि न तो आपके महल और न ही सीक्रेट सर्विस आपकी रक्षा करेगी। हम इस समय निगरानी और विश्लेषण के चरण में हैं। हमारा बदला केवल समय की बात है।'

सरकारी वीआईपी पासपोर्ट पर घूमता था दुनिया, तुर्की में हुआ गिरफ्तार

अल-सादी कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि ईरान और इराक के आतंकी नेटवर्क का एक बहुत बड़ा चेहरा है। गिरफ्तारी के वक्त उसके पास इराक का 'सर्विस पासपोर्ट' था, जो केवल प्रधानमंत्री की सहमति से बड़े अधिकारियों को मिलता है। इस वीआईपी पासपोर्ट की वजह से एयरपोर्ट पर उसकी कोई चेकिंग नहीं होती थी और वह आसानी से किसी भी देश का वीजा हासिल कर लेता था।

ट्रैवल एजेंसी की आड़ में चला रहा रहा था नेटवर्क

उसने एक ट्रैवल एजेंसी खोली थी, जो धार्मिक यात्राएं कराती थी। इसी की आड़ में वह दुनिया भर में घूमकर आतंकी स्लीपर सेल्स से जुड़ता था। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के अनुसार, अल-सादी को 15 मई को तुर्की में गिरफ्तार किया गया और वहां से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया। उस पर अमेरिका और यूरोप में 18 हमलों और हमलों की कोशिशों के आरोप हैं।

हिजबुल्लाह से कनेक्शन और जेल की कालकोठरी में बंद

खुफिया विशेषज्ञों और बंधक रहकर छूटीं एलिजाबेथ त्सुरकोव के अनुसार, अल-सादी ईरान की IRGC और कुख्यात संगठन 'कताइब हिजबुल्लाह' दोनों के लिए काम करता था। सुलेमानी की मौत के बाद जो नए कमांडर (इस्माइल कनी) आए, वे भी अल-सादी के आतंकी नेटवर्क को लगातार पैसा और हथियार सप्लाई कर रहे थे।

खतरनाक आतंकी अल-सादी को फिलहाल ब्रुकलिन के 'मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर' (MDC) की एक सुनसान कालकोठरी में बेहद सख्त सुरक्षा के बीच रखा गया है। इसी जेल में वेनेजुएला के पकड़े गए तानाशाह निकोलास मादुरो को भी रखा गया है।

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