अब गंडक नदी में नेपाल की नई करतूत ने बढ़ा दी टेंशन, भारत को बताए बिना मनमानी करने लगा ये काम

Nepal Illegal Mining: नेपाल में हाल ही में बालेन शाह के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ है। नई सरकार बनने के बाद भी सीमावर्ती मुद्दों पर कोई पॉजिटिव बदलाव देखने को नहीं मिला है। इसेक उलट नेपाल ने भारत को बिना कोई पूर्व सूचना दिए मनमानी ढंग से सीमावर्ती इलाकों में भारी निर्माण और खुदाई का काम शुरू कर दिया है

अपडेटेड May 23, 2026 पर 11:47 AM
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गंडक नदी में नेपाल की तरफ से की जा रही अवैध माइनिंग ने दोनों देशों के बीच कड़ा तनाव पैदा कर दिया है

Nepal Illegal Mining: भारत और उसके सदियों पुराने पड़ोसी मित्र देश नेपाल के बीच कूटनीतिक रिश्तों में एक बार फिर कड़वाहट आ गई है। उत्तराखंड सीमा से सटा ऐतिहासिक 'लिपुलेख' और सीमा शुल्क से जुड़ा 'भंसार' विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बहने वाली गंडक नदी में नेपाल की तरफ से की जा रही अवैध माइनिंग ने दोनों देशों के बीच कड़ा तनाव पैदा कर दिया है।

नेपाल में हाल ही में बालेन शाह के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ है, लेकिन इसके बावजूद सीमावर्ती मुद्दों पर कोई पॉजिटिव बदलाव दिखने के बजाय नेपाल ने भारत को बिना कोई पूर्व सूचना दिए मनमानी ढंग से सीमावर्ती इलाकों में भारी निर्माण और खुदाई का काम शुरू कर दिया है।

बिना तालमेल गंडक नदी में हो रहा अंधाधुंध खनन


यह ताजा विवाद नेपाल के पश्चिम नवलपरासी जिले में आने वाली सुस्ता गांवपालिका की एकतरफा प्रशासनिक कार्रवाई के कारण खड़ा हुआ है। सुस्ता गांवपालिका ने अंतरराष्ट्रीय नियमों और भारतीय पक्ष के साथ बिना किसी तालमेल या सूचना के, गंडक नदी की मुख्य धारा से बालू, पत्थर और ग्रेवल निकालने का एक बहुत बड़ा ठेका एक निजी कंपनी 'बज्र गुरु महालक्ष्मी जे.भी.' को सौंप दिया है।

यह पूरा खनन कार्य 'बी गैप बांध' के बेहद संवेदनशील सुरक्षा जोन के पास चल रहा है, जिसे लेकर उत्तर प्रदेश के महराजगंज खंड के सिंचाई विभाग ने अपनी गंभीर और आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई है।

Nepal Illegal Mining

उच्च स्तरीय काठमांडू बैठक के फैसलों का खुला उल्लंघन

उत्तर प्रदेश सिंचाई खंड द्वितीय (महराजगंज) के सहायक अभियंता रंजीत सिंह के मुताबिक, नेपाल का यह कदम 'भारत-नेपाल जॉइंट कमेटी ऑन कोशी गंडक प्रोजेक्ट' के नियमों का खुला उल्लंघन है।

गौरतलब है कि 30 अप्रैल को काठमांडू में हुई दोनों देशों की उच्चस्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया था कि बिना एक संयुक्त समन्वय समिति के गठन के गंडक नदी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति या नदी की धारा से छेड़छाड़ करने वाला कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा। नेपाल ने इस सहमति को पूरी तरह ताक पर रख दिया है।

भारतीय सीमा पर मंडराया भयानक बाढ़ का खतरा

बी गैप बांध के ठोकर नंबर 15 और 16 के पास जब भारतीय और नेपाली इंजीनियरों की संयुक्त टीम औचक निरीक्षण के लिए पहुंची, तो वहां बड़े पैमाने पर भारी मशीनों और हाईवा गाड़ियों से नदी का सीना चीरकर उत्खनन किया जा रहा था।भारतीय अधिकारियों ने मौके पर मौजूद सुस्ता गांवपालिका के अध्यक्ष (मेयर) टेक नारायण उपाध्याय को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है:

  • इस बेतरतीब और अवैध खनन के कारण गंडक नदी की प्राकृतिक धारा बदल जाएगी।
  • इससे सुस्ता बांध, गंडक मुख्य बांध और भारत के सीमावर्ती मैदानी इलाकों उत्तर प्रदेश और बिहार में भयानक बाढ़ का जोखिम पैदा हो जाएगा।
  • पिछले साल भी इसी तरह की मनमानी माइनिंग के चलते नदी का तेज बहाव सुस्ता और नरसही क्षेत्र की तरफ मुड़ गया था, जिससे बड़ी तबाही की स्थिति बन गई थी।
  • इस रुख के बाद उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने भू-आर्जन कार्यालय के लाइजन ऑफिसर शोभित हलुवाई के साथ मिलकर नेपाल के नवलपरासी जिले के जिलाधिकारी से मुलाकात की है और इस विवादित खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की है।

लिपुलेख और भंसार विवाद ने भी सुलगाई कूटनीतिक चिंगारी

गंडक नदी के इस ताजे तनाव के साथ-साथ दोनों देशों के बीच सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील 'लिपुलेख दर्रा' विवाद भी दोबारा सुलग उठा है। अप्रैल-मई 2026 में नेपाल में नई सरकार आने के बाद से इस मुद्दे पर कूटनीतिक तल्खी काफी बढ़ गई है। भारत, चीन (तिब्बत) और नेपाल के त्रि-जंक्शन पर स्थित लिपुलेख को भारत जहां उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का अटूट हिस्सा मानता है, वहीं नेपाल का नया राजनीतिक नेतृत्व इस पर अपना दावा जता रहा है।

इस विवाद को हवा तब मिली जब अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के पारंपरिक मार्ग से 'कैलाश मानसरोवर यात्रा' को पूर्ण रूप से दोबारा शुरू करने पर एक महत्वपूर्ण सहमति बनी, जिस पर नेपाल ने आपत्ति जताई है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच सीमा शुल्क यानी 'भंसार नियमों' को लेकर चल रही आर्थिक रार ने सीमावर्ती स्थानीय व्यापार को भारी नुकसान पहुंचाया है, हालांकि फिलहाल कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस टैक्स विवाद पर रोक लगी हुई है।

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