इजरायल ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालिबाफ को अपनी “हिट लिस्ट” से हटा दिया। एक पाकिस्तानी अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा था कि इन दोनों नेताओं को निशाना न बनाया जाए। अधिकारी ने बताया, “इजरायल के पास उनकी लोकेशन थी और वह उन्हें खत्म करना चाहता था। हमने अमेरिका से कहा कि अगर ये भी मारे गए तो बातचीत के लिए कोई नहीं बचेगा, इसलिए अमेरिका ने इजरायल से पीछे हटने को कहा।”
इससे पहले एक रिपोर्ट में कहा गया था कि संभावित शांति वार्ता को देखते हुए इन दोनों नेताओं को कुछ दिनों के लिए हिट लिस्ट से हटाया गया है। हालांकि उसमें पाकिस्तान की भूमिका का जिक्र नहीं था।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम कराने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की मध्यस्थ (मीडिएटर) की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान इस समय वॉशिंगटन और तेहरान- दोनों से सीधे संपर्क में है, जबकि ज्यादातर देशों के लिए ये चैनल बंद हैं।
साथ ही, पाकिस्तान को संभावित शांति वार्ता की जगह के रूप में भी देखा जा रहा है।
इसी बीच, अराघची ने कहा कि ईरान ने भारत समेत “दोस्त देशों” के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है। इनमें चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “हमारे नजरिए से होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं है- यह सिर्फ दुश्मनों के लिए बंद है। दुश्मन देशों और उनके सहयोगियों के जहाजों को गुजरने देने का कोई कारण नहीं है।”
बताया जा रहा है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 बिंदुओं का एक प्रस्ताव भेजा है, जिस पर तेहरान विचार कर रहा है।
इस प्रस्ताव में ईरान के उच्च स्तर के यूरेनियम भंडार को खत्म करना, परमाणु संवर्धन रोकना, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक और क्षेत्रीय सहयोगियों को फंडिंग बंद करना जैसी शर्तें शामिल हैं।
ट्रंप ने कहा है कि ईरान समझौते के लिए बेताब है। लेकिन अराघची का कहना है कि ईरान प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है, पर फिलहाल संघर्ष खत्म करने के लिए बातचीत करने का उसका कोई इरादा नहीं है।