Israel-Iran War: इजरायल के निशाने पर ईरानी तेल इंफ्रास्ट्रक्चर! तेहरान में शहरान ऑयल डिपो पर बड़ा हमला, भीषण आग के साथ आसमान में हर तरफ धुएं का गुबार

Israel-US Iran War: शनिवार (7 मार्च) देर रात इजरायली हमले के बाद ईरान के उत्तरी तेहरान के बाहरी इलाके में स्थित शहरान तेल डिपो में लगी भीषण आग की फुटेज सामने आई है। इजरायली सेना ने ईरान के फ्यूल स्टोरेज और उससे जुड़ी जगहों पर हमला करने की जिम्मेदारी ली है

अपडेटेड Mar 08, 2026 पर 9:04 AM
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Israel-US Iran War: इजरायल ने अब ईरान में ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना शुरू कर दिया है

Israel-US Iran War: इजरायल और अमेरिका ने अब ईरान में स्थित बड़े ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित सबसे बड़े शहरान तेल डिपो पर इजरायल ने बड़ा हमला किया है। हमले के बाद तेल डिपो में भीषण आग लग गई है। आग लगने के बाद तेल डिपो में हवा में धुआं का गुबार दिखाई दिया। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, शनिवार (7 मार्च) देर रात इजरायली हमले के बाद उत्तरी तेहरान के बाहरी इलाके में स्थित शहरान तेल डिपो में लगी भीषण आग की फुटेज सामने आई है।

इजरायली सेना ने फ्यूल स्टोरेज और उससे जुड़ी जगहों पर हमला करने की जिम्मेदारी ली है। इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने कहा है कि उसने इंटेलिजेंस गाइडेंस पर काम करते हुए तेहरान में कई ईरानी फ्यूल डिपो पर हमला किया। हमले के बाद मौके से कई विज़ुअल्स सामने आए हैं। इसमें शहरान ऑयल डिपो से आग और धुएं के गुबार उठते दिख रहे हैं।

IDF ने एक बयान में कहा, "ईरानी आतंकी शासन की फोर्सेज मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने के लिए इन फ्यूल टैंकों का सीधा और बार-बार इस्तेमाल करती हैं। इनके जरिए, ईरानी आतंकी शासन ईरान में मिलिट्री एंटिटीज सहित अलग-अलग कंज्यूमर्स को फ्यूल बांटता है।"


बयान में कहा गया है कि यह हमला ईरानी आतंकी शासन के मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान को और गहरा करने की दिशा में एक और कदम है। इससे पहले, ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि राजधानी के मेन रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स के पास दक्षिणी तेहरान में एक तेल डिपो पर हमला हुआ। बाद में ILNA न्यूज़ एजेंसी ने दावा किया कि उसे कोई नुकसान नहीं हुआ है।

इजरायल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान के शीर्ष नेतृत्व के मारे जाने से शुरू हुआ अमेरिका-ईरान युद्ध उम्मीद से कहीं अधिक लंबा खिंच सकता है। कई लोग इसके छोटा और निर्णायक होने की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन ईरान पश्चिमी देशों के अनुमानों से कहीं अधिक मजबूती से मुकाबला कर रहा है।

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान में हमले कर परमाणु सुविधाओं, सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर, नौसैनिक अड्डों और वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाया था। फिर इसका जवाब देते हुए ईरान ने भी खाड़ी में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इसमें तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। इसके बाद अमेरिका ने फिर से जवाबी कार्रवाई का संकल्प दोहराया है।

एक्सर्ट का कहना है कि अमेरिका की ओर से युद्ध के स्पष्ट लक्ष्यों की कमी के कारण भी शांति बहाली में मुश्किलें आ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सोचना भी गलत हो सकता है कि ईरानी जनता शीर्ष नेताओं की हत्या का फायदा उठाकर सत्ता के खिलाफ विरोध कर देगी। ईरान एक प्राचीन राष्ट्र है जिसमें राष्ट्रवाद की भावना कूट-कूट कर भरी है। वहां के लोग स्थिरता के बदले अराजक सत्ता परिवर्तन को कभी नहीं चुनना चाहेंगे।

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इसके अलावा, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या ने स्थितियों को और अधिक जटिल बना दिया है। खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरानी शासन का सैन्य और धार्मिक आग्रह और बढ़ सकता है। सबसे बड़ा खतरा बदले की भावना में छिपा है। यदि ईरान को लगता है कि अमेरिकी हमले उसके अस्तित्व के लिए खतरा हैं, तो वह एक व्यापक युद्ध की ओर बढ़ सकता है।

इजरायल अब ईरानी तेल संपत्तियों पर हमले कर सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी कर तेल के वैश्विक परिवहन को बाधित कर सकता है, जो वैश्विक संकट में बदल जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से चार सप्ताह की समय सीमा का सुझाव दिया है। लेकिन उनके संदेश स्पष्ट नहीं हैं क्योंकि उन्होंने ईरान के नए नेतृत्व के साथ सौदा करने की इच्छा भी जताई है।

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