US-Israel-Iran War: लेबनान की हेल्थ मिनिस्ट्री ने कहा है कि सेंट्रल बेरूत में रमाडा होटल की बिल्डिंग के एक अपार्टमेंट पर इजरायली हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई। पिछले सप्ताह इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) और हिजबुल्लाह के बीच युद्ध फिर से शुरू होने के बाद से यह राजधानी के बीचों-बीच हुआ पहला हमला है। हेल्थ मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा कि बेरूत के राउचे इलाके में हुए हमले में 10 लोग घायल भी हुए हैं।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यह होटल दक्षिणी लेबनान और बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में लड़ाई से भागे बेघर लोगों को पनाह दे रहा था। कुछ लोगों को आगे हवाई हमलों के डर से बिल्डिंग से निकलते देखा गया। इस बारे में तुरंत कोई और जानकारी नहीं मिली। इजरायल की तरफ से भी तत्काल कोई कमेंट नहीं आया।
ईरान के सपोर्ट वाले मिलिटेंट ग्रुप हिजबुल्लाह के इजरायल में रॉकेट और ड्रोन लॉन्च करने के बाद सोमवार को लेबनान ईरान के साथ बढ़ते अमेरिका-इजरायल संघर्ष में शामिल हो गया। इसके जवाब में इजरायल ने दक्षिणी और पूर्वी लेबनान के साथ-साथ बेरूत के पास के इलाकों में भारी हमले किए।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों में मौत और फिर लगातार हो रहे हमलों ने लेबनान में बड़ी मुश्किल से बहाल शांति को और अधिक खतरे में डाल दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान समर्थित आतंकी संगठन हिजबुल्लाह की प्रतिक्रिया देश को एक बार फिर बड़े संघर्ष और अस्थिरता की ओर धकेल सकती है।
खामेनेई की मौत के बाद लेबनान से सक्रिय हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल की ओर रॉकेट दागे। इसके जवाब में इजरायल ने दक्षिणी लेबनान, बेरूत और पूर्वी बेका घाटी में संगठन के ठिकानों पर नए हवाई हमले किए। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही हिजबुल्लाह अब पहले जितना शक्तिशाली नहीं रहा। फिर भी उसके कदम लेबनान को गंभीर संकट में डाल सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हिजबुल्लाह फिलहाल अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान के युद्ध में प्रभावी सैन्य सहयोगी बनने की स्थिति में नहीं है। लेकिन उसकी गतिविधियां लेबनान को अस्थिर कर सकती हैं। इसके साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि हिजबुल्लाह की प्रतिक्रिया को बहाना बनाकर इजरायल या सीरिया लेबनान में जमीनी अभियान शुरू कर सकते हैं।
हिजबुल्लाह की स्थापना 1985 में 1979 की ईरानी क्रांति से प्रेरित होकर की गई थी। संगठन ने ईरान के क्रांतिकारी नेता अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी के प्रति निष्ठा जताई थी। उसने इजरायल के खिलाफ संघर्ष को अपना प्रमुख उद्देश्य बताया था। पिछले चार दशकों में इस संगठन ने लेबनान की राजनीति और विदेश नीति पर गहरा प्रभाव बनाए रखा।
हालांकि अक्टूबर 2023 के बाद इजरायल के लगातार हमलों में उसके कई शीर्ष नेता मारे गए, जिससे उसकी ताकत कमजोर पड़ी। इसके बाद कई लोगों को उम्मीद थी कि लेबनान में हिजबुल्लाह का प्रभाव कम हो जाएगा।
लगभग एक साल तक चले संघर्ष के बाद 27 नवंबर 2024 को इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत हिजबुल्लाह को लितानी नदी के उत्तर की ओर हटना था। जबकि इजरायली सेना को 60 दिनों के भीतर दक्षिणी लेबनान से वापस जाना था।
अमेरिका की मध्यस्थता से हुआ यह समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। इजरायल का कहना है कि लेबनानी सेना हिजबुल्लाह को निरस्त्र करने में पर्याप्त तेजी नहीं दिखा रही है। जबकि हिजबुल्लाह का आरोप है कि इजरायल लगातार हमले कर समझौते का उल्लंघन कर रहा है।