JD Vance on Iran War Intelligence: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच ट्रंप प्रशासन के भीतर से एक हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस को यह डर सता रहा है कि पेंटागन राष्ट्रपति ट्रंप को युद्ध की असली और सटीक जानकारी नहीं दे रहा है। 'द अटलांटिक' की एक रिपोर्ट के अनुसार, वेंस ने बंद कमरों में हुई बैठकों में मिसाइल स्टॉक और लंबे खिंचते युद्ध को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
हथियारों के स्टॉक में भारी कमी
जेडी वेंस की सबसे बड़ी चिंता अमेरिका के घटते हथियार भंडार को लेकर है। कुछ आंतरिक अनुमानों से संकेत मिलता है कि अमेरिका ने अपनी महत्वपूर्ण मिसाइल प्रणालियों और इंटरसेप्टर्स का आधा से ज्यादा हिस्सा इस युद्ध में इस्तेमाल कर लिया है।हथियारों की यह कमी ताइवान, दक्षिण कोरिया या यूरोप जैसे क्षेत्रों में किसी अन्य संभावित संघर्ष के समय अमेरिका की जवाबी क्षमता को कमजोर कर सकती है।
पेंटागन और व्हाइट हाउस के दावों में अंतर?
जहां एक तरफ रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन डैन केन दावा कर रहे हैं कि अमेरिकी स्टॉक मजबूत है और ईरान को भारी नुकसान हुआ है, वहीं जेडी वेंस इन दावों की सटीकता पर स्पष्टता चाह रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप पेंटागन के आशावादी रुख का समर्थन कर रहे हैं और उन्होंने अमेरिकी सैन्य क्षमता को 'असीमित' बताया है। रिपोर्ट बताती है कि सार्वजनिक बयान शायद उन आंतरिक खुफिया आकलनों को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं कर रहे हैं जो वेंस जैसे अधिकारियों को चिंतित कर रहे हैं।
ईरान की ताकत अब भी बरकरार
हफ्तों की भीषण लड़ाई के बावजूद, खुफिया रिपोर्टें बताती हैं कि ईरान की सैन्य शक्ति काफी हद तक सुरक्षित है। ईरान ने अपनी मिसाइल लॉन्चिंग क्षमता और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर के हिस्सों को फिर से बहाल कर लिया है। ईरान की नौसेना अभी भी वैश्विक शिपिंग के लिए सबसे महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में बड़ा खतरा बनी हुई है।
ट्रंप की टीम में बढ़ रहा है तनाव
इस युद्ध के नतीजे न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि ट्रंप की टीम के भीतर भी राजनीतिक समीकरण तय करेंगे। जेडी वेंस लंबे विदेशी संघर्षों के प्रति शुरू से संशय में रहे हैं और अब नीतिगत चर्चाओं के बीच अपने भविष्य के राजनीतिक दांव-पेच संतुलित कर रहे हैं। वहीं पीट हेगसेथ ट्रंप के साथ मजबूती से खड़े हैं और युद्ध पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, जिससे प्रशासन के भीतर ही उनके संदेश देने के तरीके पर सवाल उठ रहे हैं।
शुरुआती अनुमानों के विपरीत, अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष अब एक लंबे और अनिश्चित गतिरोध में बदल गया है। देने देशों के बीच बातचीत की कोशिशें फिलहाल नाकाम साबित हुई हैं और इस क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।