Epstein Files: जेफरी एपस्टीन पर नया खुलासा; बढ़ाना चाहता था उम्र, करा रहा था जेनेटिक टेस्टिंग

Epstein Files: एपस्टीन की जेनेटिक्स और लंबी उम्र में दिलचस्पी के बारे में पहले भी रिपोर्ट आई हैं। अपनी फाउंडेशन के जरिए एपस्टीन ने वर्ल्ड ट्रांसह्यूमनिस्ट एसोसिएशन को डोनेट किया था। यह इंसानी क्षमताओं को बढ़ाने और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को उलटने के लिए टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देता है

अपडेटेड Feb 07, 2026 पर 11:29 AM
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एपस्टीन ने वेश्यावृत्ति के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद अपने खुद के जेनेटिक मैटिरियल का इस्तेमाल रीजेनरेटिव मेडिसिन के लिए करने की कोशिश की।

यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। सामने आया है कि वह अपनी उम्र बढ़ाना चाहता था। अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी किए गए नए दस्तावेजों से पता चलता है कि जेफरी एपस्टीन ने 2008 में दोषी ठहराए जाने के सालों बाद जेनेटिक टेस्टिंग के लिए पैसे दिए और लंबी उम्र पर एक्सपेरिमेंटल रिसर्च कराई। इस नए खुलासे से प्रमुख वैज्ञानिकों और एलीट रिसर्च संस्थानों के साथ एपस्टीन के संबंधों की फिर से जांच शुरू हो गई है।

CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, नए जारी किए गए ईमेल में मेंशन है कि एपस्टीन ने वेश्यावृत्ति के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद अपने खुद के जेनेटिक मैटिरियल का इस्तेमाल रीजेनरेटिव मेडिसिन के लिए करने की कोशिश की। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसका मकसद नए टिश्यू और अंग विकसित करके शरीर की मरम्मत करना है।

जेफरी एपस्टीन अमेरिका का एक बड़ा फाइनेंसर और अकूत संपत्ति का मालिक था। उसे सुंदर महिलाओं से घिरे रहना पसंद था। वह बड़ी-बड़ी पार्टियां करता था, जिसमें बड़ी संख्या में खूबसूरत महिलाएं, अमीर और प्रभावशाली अमेरिकी लोग भी आते थे। उसकी दुनिया तब उजड़नी शुरू हुई, जब उस पर नाबालिगों से वेश्यावृति कराने के आरोप में मुकदमा चला। कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद उसे यौन अपराधों का दोषी मानते हुए जेल की सजा सुनाई। 10 साल तक जेल में बिताने के बाद 2019 में उसने जेल में ही आत्महत्या कर ली। एपस्टीन की कथित प्रेमिका घिसलेन मैक्सवेल को 2021 में किशोर लड़कियों की तस्करी में मदद करने का दोषी ठहराया गया। वह वर्तमान में 20 साल की जेल की सजा काट रही है।


जोसेफ ठाकुरिया और एपस्टीन के बीच लिंक

दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन ने जोसेफ ठाकुरिया द्वारा की गई जेनेटिक टेस्टिंग के लिए पैसे दिए। ठाकुरिया उस समय बोस्टन के मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल (MGH) में एक सीनियर फिजीशियन थे और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के पर्सनल जीनोम प्रोजेक्ट (PGP) से जुड़े एक रिसर्चर थे। PGP जेनेटिक जानकारी का एक बड़ा पब्लिक डेटाबेस है, जिसे दुनिया भर के वैज्ञानिक इस्तेमाल करते हैं।

फरवरी 2014 में ठाकुरिया ने कथित तौर पर एपस्टीन को एक प्रस्ताव भेजा, जिसमें एक प्राइवेट जीनोमिक्स प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग मांगी गई थी। यह प्रोजेक्ट बीमारियों के जेनेटिक कारणों की स्टडी करने के लिए मरीजों के जीनोम को सीक्वेंस करने के लिए था। ईमेल के अनुसार, प्रस्ताव में विशेष रूप से एपस्टीन के लिए तैयार की गई रिसर्च की रूपरेखा भी थी।

शुरुआती इनवॉइस 2000 डॉलर का

जून 2014 में ठाकुरिया ने कई रिसर्च सर्विसेज की डिटेल देते हुए एक इनवॉइस भेजा, जिसमें एपस्टीन के जीनोम के कुछ हिस्सों को सीक्वेंस करने के लिए शुरुआती 2,000 डॉलर का पेमेंट शामिल था। इनवॉइस में बताया गया था कि एपस्टीन ने लार का सैंपल दिया था। इस पेमेंट में एपस्टीन के एक्सोम, जीनोम के प्रोटीन-कोडिंग हिस्से, और फाइब्रोब्लास्ट, कनेक्टिव टिश्यू सेल्स की सीक्वेंसिंग शामिल थी। इनका इस्तेमाल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को उलटने के उद्देश्य से एक्सपेरिमेंटल रिसर्च में किया गया। ईमेल से पता चलता है कि एपस्टीन के स्टाफ ने उसी दिन 2,000 डॉलर का चेक भेजा था।

ठाकुरिया ने CNN को दिए एक बयान में कहा, "मिस्टर एपस्टीन पर्सनल जीनोम प्रोजेक्ट में एनरोल थे, जो विभिन्न हेल्थ कंडीशंस को लेकर उनकी जेनेटिक प्रवृत्ति का अध्ययन कर रहा था। एक समय पर DNA सीक्वेंसिंग को कवर करने के लिए 2,000 डॉलर का चेक दिया गया था।"

आगे कहा, "मैं एक डॉक्टर-रिसर्चर था और एपस्टीन एक रिसर्च सब्जेक्ट था।" यह भी बताया, "हमने संभावित रूप से रिसर्च को उनके द्वारा फंड किए जाने के बारे में शुरुआती चर्चा भी की थी, लेकिन वह कभी साकार नहीं हुआ।"

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क्या थी CRISPR-बेस्ड लान्जेविटी स्टडी

इनवॉइस में भविष्य के अधिक अनुमानित और महंगे काम की भी रूपरेखा है। ठाकुरिया ने स्टडी को "पर्सनलाइज्ड लान्जेविटी स्टडी" करार दिया है। इसमें CRISPR (Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats) का इस्तेमाल करके जीन एडिटिंग शामिल है, जो उस समय एक अपेक्षाकृत नई तकनीक थी। ठाकुरिया के अनुसार, प्रपोजल के एक हिस्से में एपस्टीन के स्टेम सेल्स को एडिट करना शामिल था, ताकि कल्चर में ऐसे म्यूटेशन डाले जा सकें, जिनसे उम्र बढ़ने की उम्मीद हो।

दस्तावेज में नए स्टेम सेल्स बनाने जैसे ऑप्शन लिस्ट किए गए, जिनकी कॉस्ट 10,000 डॉलर से शुरू होती थी। सिर्फ एपस्टीन के लिए पूरी जीनोम सीक्वेंसिंग की कीमत 11,400 डॉलर थी। अगर उसके माता-पिता दोनों को शामिल किया जाता तो कॉस्ट 21,000 डॉलर होती। सभी प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 193,400 डॉलर रहने का अनुमान था।

CNN के अनुसार, हालांकि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला कि एपस्टीन ने अतिरिक्त सेवाओं के लिए भुगतान किया हो। लेकिन एपस्टीन, ठाकुरिया और एपस्टीन के असिस्टेंट के बीच ईमेल के माध्यम से बातचीत कम से कम 2015 तक जारी रही। कुछ ईमेल्स में एपस्टीन के सहायकों ने नतीजों के लिए दबाव डाला, और एक समय पर एपस्टीन ने देरी के कारण ठाकुरिया की शिकायत अस्पताल की लीडरशिप से करने की धमकी दी।

द वीनस प्रोजेक्ट

CNN की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2014 के इनवॉइस में सबसे बड़ी चीज 160,000 डॉलर का "द वीनस प्रोजेक्ट" था। रिपोर्ट में ठाकुरिया के हवाले से कहा गया है, "जेफरी और मैंने एक जीनोमिक रिसर्च स्टडी पर संक्षेप में चर्चा की, जिसे मैं वीनस प्रोजेक्ट कह रहा हूं। इस काम के लिए बड़े बायोइन्फॉर्मेटिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी।" प्रपोजल में जीनोमिक हार्डवेयर के लिए 100,000 डॉलर और सॉफ्टवेयर के लिए सालाना 60,000 डॉलर का जिक्र था। साथ ही सुझाव दिया गया था कि इस प्रोजेक्ट में 200 पार्टिसिपेंट शामिल हो सकते हैं। CNN को दिए अपने बयान में ठाकुरिया ने कहा कि यह प्रोजेक्ट मिस्टर एपस्टीन का एक विचार था, जो बहुत शुरुआती था और कभी आगे नहीं बढ़ा।

हालांकि, ठाकुरिया का पहले सार्वजनिक रूप से एपस्टीन से कोई संबंध नहीं रहा है और उन पर किसी भी गलत काम का आरोप नहीं है। उन्हें जॉर्ज चर्च ने एपस्टीन से मिलवाया था। चर्च हार्वर्ड के एक जाने-माने जीनोमिक्स रिसर्चर और CRISPR टेक्नोलॉजी के दिग्गज हैं। उन्होंने एपस्टीन को पर्सनल जीनोम प्रोजेक्ट के लिए एक संभावित रिसर्च सब्जेक्ट के तौर पर मिलवाया था।

चर्च ने एपस्टीन के साथ अपने पिछले जुड़ाव को स्वीकार किया है। एपस्टीन ने उनकी रिसर्च के लिए डोनेशन दी थी और वे अक्सर बातचीत करते थे। 2019 में चर्च ने एपस्टीन के साथ संबंध बनाए रखने के लिए माफी मांगी थी। ठाकुरिया का कहना है कि उन्हें इस बात का पछतावा है कि उस समय उन्हें एपस्टीन के बैकग्राउंड और उनके अपराधों की हद के बारे में ज्यादा पता नहीं था।

कहीं जिंदा तो नहीं जेफरी एपस्टीन!

एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के हालिया खुलासे ने साजिश की उन थ्योरीज को भी फिर से जिंदा कर दिया है, जिनमें कहा गया कि उसने 2019 में अपनी मौत का नाटक किया था। हालांकि दस्तावेजों में जेनेटिक टेस्टिंग और लंबी उम्र पर रिसर्च में उसकी दिलचस्पी की जो डिटेल सामने आई है, उससे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि एपस्टीन अभी भी जिंदा है।

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