ईरान ने कहा है कि दुनिया को तेल के 200 डॉलर प्रति बैरल के भाव के लिए तैयार रहना चाहिए। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच आई इस चेतावनी ने कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। हालांकि इस बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने तेल की कीमतों को नीचे लाने के लिए स्ट्रेटेजिक रिजर्व को बड़े पैमाने पर रिलीज करने की सलाह दी। 32 देशों की इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने 400 मिलियन बैरल तेल रिलीज करने का प्लान बनाया है। इस प्लान के हिस्से के तौर पर अमेरिका अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से 172 मिलियन बैरल तेल रिलीज करने वाला है।
ईरानी अधिकारियों ने बुधवार को साफ कर दिया कि उनका इरादा लंबे समय तक चलने वाला इकोनॉमिक शॉक देने का है। ईरान के मिलिट्री कमांड के स्पोक्सपर्सन इब्राहिम जोल्फकारी ने अमेरिका को संबोधित करते हुए कहा, "तेल के 200 डॉलर प्रति बैरल होने के लिए तैयार रहें। तेल की कीमत क्षेत्रीय सुरक्षा पर निर्भर करती है, जिसे आपने अस्थिर कर दिया है।"
खाड़ी के पानी में तीन जहाजों पर हमला
रॉयटर्स के मुताबिक, लगभग दो हफ्ते पहले (28 फरवरी 2026 को) अमेरिका और इजरायल के ईरान पर जॉइंट एयरस्ट्राइक से शुरू हुए युद्ध में अब तक लगभग 2,000 लोग मारे गए हैं। इनमें ज्यादातर ईरानी और लेबनानी हैं। इस लड़ाई से ग्लोबल एनर्जी मार्केट और ट्रांसपोर्ट में अफरा-तफरी मच गई है। बुधवार को खाड़ी के पानी में तीन जहाजों पर हमले की खबर आई। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उनकी सेना ने खाड़ी में उन जहाजों पर फायरिंग की, जिन्होंने उनके ऑर्डर नहीं माने थे। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा है कि जब तक U.S. और इजरायल के हमले बंद नहीं हो जाते, तब तक वह खाड़ी से तेल शिपमेंट को रोके रखेगा। दावा किया कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री रास्ते पर नियंत्रण कर लिया है। ईरान ने इस समुद्री रास्ते में माइंस बिछाना शुरू कर दिया है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी फोर्स ने 58 ईरानी नेवी शिप्स को मार गिराया है और तेल की कीमतें कम होंगी। यह भी कहा कि अमेरिका अब होर्मुज स्ट्रेट पर बहुत ध्यान से नजर रखेगा। स्ट्रेट बहुत अच्छी हालत में हैं। अमेरिका ने उनकी सभी नावों को खत्म कर दिया है। ट्रंप की बातों के बावजूद, ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि जहाज स्ट्रेट से सुरक्षित रूप से गुजर सकते हैं।
तेल की कीमतें इस हफ्ते की शुरुआत में लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गई थीं। फिर गिरकर लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल पर वापस आ गईं। लेकिन अब यह फिर बढ़कर 100 डॉलर के मार्क को क्रॉस कर गई हैं। बुधवार को G7 देशों का ग्रुप- यूनाइटेड स्टेट्स, कनाडा, जापान, इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस इस बात पर सहमत हुए कि जहाजों को एस्कॉर्ट (सैन्य सुरक्षा के साथ सिक्योरिटी) देने के ऑप्शन पर विचार किया जाए, ताकि जहाज खाड़ी में आजादी से नेविगेट कर सकें।