Iran US Conflict: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे शांति प्रयासों के दौरान ही मिडल-ईस्ट के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर मिसाइल हमला किया है। यह कार्रवाई ओमान की खाड़ी में एक ईरानी तेल टैंकर पर अमेरिकी हमले के जवाब में की गई बताई जा रही है। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर (IRIB) ने सैन्य अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सक्रिय दुश्मन की इकाइयों पर ईरानी सेना ने मिसाइलों से हमला किया है।
ईरान का दावा: नुकसान के बाद भागे अमेरिकी जहाज
ईरानी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, ओमान की खाड़ी में अमेरिका द्वारा एक ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाया गया था। इसके बाद यह जवाबी कार्रवाई की गई। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी अधिकारी ने बताया कि ईरानी टैंकर पर अमेरिकी हमले के बाद, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मौजूद हमलावर दुश्मन के जहाज ईरानी मिसाइल की चपेट में आ गए। भारी नुकसान झेलने के बाद वे पीछे हटने और भागने पर मजबूर हो गए।
अमेरिका ने क्यों की थी टैंकर पर कार्रवाई?
ईरान का यह हमला उस घटना के ठीक एक दिन बाद हुआ है जब अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी ध्वज वाले एक तेल टैंकर M/T Hasna पर गोलीबारी की थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि 6 मई को सुबह 9 बजे (ET) अमेरिकी बलों ने ईरानी बंदरगाह की ओर जा रहे इस टैंकर को रोका था। जब टैंकर के चालक दल ने बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया, तो विमान वाहक पोत USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) से उड़ान भरने वाले एक F/A-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने टैंकर पर 20mm की तोप से कई राउंड फायरिंग की। इस हमले में टैंकर का 'रडर' (Rudder) खराब हो गया, जिससे जहाज आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया।
अमेरिका ने इसे नौसैनिक नाकाबंदी का हिस्सा बताया था
अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान के खिलाफ जारी नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) को लागू करने का हिस्सा है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने या वहां से बाहर निकलने वाले जहाजों पर उसकी नाकाबंदी पूरी तरह प्रभावी है और वे इसे सुनिश्चित करने के लिए पेशेवर तरीके से काम करना जारी रखेंगे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के कुल तेल व्यापार के एक-तिहाई हिस्से का मार्ग है। ईरान और अमेरिका के बीच सीधे मिसाइल विनिमय (Missile Exchange) ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। हालांकि ईरान नुकसान पहुंचाने का दावा कर रहा है, लेकिन अभी तक अमेरिका की ओर से अपने जहाजों को हुए नुकसान पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।