ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध शुरू हुए अभी कुछ ही हफ्ते हुए हैं। लेकिन अभी से अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज रिकॉर्ड 39 लाख करोड़ डॉलर के पार पहुंच गया है। यह आंकड़ा अमेरिकी प्रशासन की अलग-अलग प्राथमिकताओं को दिखाता है- जैसे कि एक बड़ा टैक्स कानून पास करना, रक्षा खर्च और इमिग्रेशन पर सख्ती बढ़ाना आदि। कर्ज कम करने का वादा डोनाल्ड ट्रंप ने एक उम्मीदवार के तौर पर और अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद भी किया था।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस ने अमेरिकियों पर बढ़ते सरकारी कर्ज के कुछ असर बताए हैं- जैसे कि मॉर्गेज और कारों जैसी चीजों के लिए उधार लेने की लागत बढ़ना, व्यवसायों के पास निवेश के लिए कम पैसा होने के कारण मजदूरी कम होना, सामान व सेवाओं का महंगा होना।
ऐसा ही रहा तो आगे लेने पड़ेंगे और भी मुश्किल आर्थिक फैसले
संतुलित बजट की पैरवी करने वाले चेतावनी दे रहे हैं कि ज्यादा उधार लेने और उस पर ज्यादा ब्याज चुकाने का यह लंबे समय से चला आ रहा चलन, अमेरिकियों को भविष्य में और भी मुश्किल आर्थिक फैसले लेने पर मजबूर करेगा। बढ़ती लागतें भी चिंता का विषय हैं। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों ही पार्टियों के राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में संघीय कर्ज में भारी बढ़ोतरी हुई है। हाल के समय में युद्धों, महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर किए गए खर्च और टैक्स में कटौती ने इस बढ़ोतरी को और तेज किया है। अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 5 महीने पहले 38 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गया था।
मिडिल ईस्ट में जंग पर अभी तक कितना खर्च
व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने अनुमान लगाया है कि ईरान में चल रहे युद्ध पर अमेरिका अब तक 12 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुका है। यह अभी साफ नहीं है कि यह युद्ध कब खत्म होगा। अमेरिकी ट्रेजरी की फिस्कल डेटा वेबसाइट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में अमेरिकी सरकार का कुल खर्च 7.01 लाख करोड़ डॉलर था। कुल रेवेन्यू 5.23 लाख करोड़ डॉलर था। इसके चलते 1.78 लाख करोड़ डॉलर का घाटा हुआ, जो वित्त वर्ष 2024 के मुकाबले 41 अरब डॉलर कम है।