Nepal Squatters Rehabilitation: नेपाल में बनी बालेन शाह की सरकार लगातार सुर्खियों में हैं। Gen-Z रेवोल्यूशन के बाद बनी इस सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए है जिनकी खूब चर्चा हो रही है। अब एक बार फिर से एक नया फैसला लिया गया है जो बेहद महत्वपूर्ण है। नेपाल में राजधानी काठमांडू की नदियों के किनारों और सार्वजनिक जमीनों से हटाए गए भूमिहीन झुग्गीवासियों को लेकर प्रधानमंत्री बालेन शाह सरकार ने बड़ी राहत दी है।
मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सरकार ने विस्थापित हुए प्रत्येक भूमिहीन और झुग्गीवासी परिवार को अस्थायी आश्रय और पुनर्वास सहायता के रूप में ₹15000 प्रति माह देने का निर्णय लिया है।
यह वित्तीय सहायता अगले तीन महीनों तक उन परिवारों को दी जाएगी जिन्हें बागमती नदी के किनारों और काठमांडू घाटी की अन्य सार्वजनिक जमीनों से अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत बेदखल किया गया था। सरकार के इस फैसले के बाद जमकर आक्रोश देखने को मिला था।। कई दिनों तक प्रदर्शन हुए और उग्र आंदोलन में दर्जनों लोगों की जान चली गई थी।
पुनर्वास के लिए मिलेंगे ₹25000 एकमुश्त
बालेन शाह कैबिनेट ने केवल मासिक भत्ता ही नहीं, बल्कि इन विस्थापित परिवारों के स्थाई पुनर्वास के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने फैसला किया है कि काठमांडू घाटी में नदियों के किनारों और सरकारी जमीनों पर रहने वाले सुकुमबासी के विवरण और डेटा का पूरी तरह वेरिफिकेशन किया जाएगा। डेटा वेरिफाई होने के तुरंत बाद प्रत्येक पात्र परिवार को पुनर्वास सहायता के रूप में ₹25000 की एकमुश्त राशि प्रदान की जाएगी।
अतिक्रमण हटाओ अभियान से विस्थापित हुए 15000 लोग
नेपाल सरकार ने पिछले महीने काठमांडू घाटी में अवैध बस्तियों और सार्वजनिक जमीनों को मुक्त कराने के लिए एक बड़ा बेदखली अभियान शुरू किया था। इस अभियान के तहत अब तक काठमांडू घाटी में 2600 से अधिक घरों को तोड़ा जा चुका है, जिससे करीब 15000 लोग विस्थापित हुए हैं। वर्तमान में इन बेघर लोगों को नेपाल विद्युत प्राधिकरण के खरीपाटी स्थित गेस्ट हाउस और विभिन्न होल्डिंग सेंटरों में अस्थायी रूप से ठहराया गया है।
लॉन्ग-टर्म सॉल्यूशन की हो रही मांग
सरकार की इस तात्कालिक आर्थिक मदद के बावजूद, विस्थापित लोग इस समस्या का एक स्थाई समाधान चाहते हैं। भूमिहीन झुग्गीवासियों की मांग है कि सरकार उन्हें सिर्फ नकद पैसे न दे, बल्कि रहने के लिए जमीन का टुकड़ा और मकान बनाने की लागत भी मुहैया कराए।
काठमांडू के शंखमुल इलाके के एक विस्थापित पवन गुरुंग ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया, 'प्रशासन ने हमारे तीन मंजिला मकान को जमींदोज कर दिया, जहां हम बिना जमीन के मालिकाना हक के आधी सदी से रह रहे थे। हम इस उम्मीद में हैं कि सरकार कोई ठोस रास्ता निकालेगी।'
इस बीच 'भूमिहीन और अव्यवस्थित झुग्गीवासी संघर्ष समिति' ने शाह सरकार को कड़े लहजे में अल्टीमेटम दिया है। समिति का कहना है कि अगर सरकार ने उन्हें वैकल्पिक आश्रय और जमीन के टुकड़े देने की स्थायी मांग को पूरा नहीं किया, तो अगले महीने से काठमांडू सहित देश के अन्य हिस्सों में उग्र और बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।