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Kailash Mansarovar Yatra: लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल को आपत्ति, भारत और चीन को दोटूक- 'यह हमारा इलाका है'

Kailash Mansarovar Yatra: नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा का क्षेत्र उसका संप्रभु हिस्सा है और बिना उसकी इजाजत के वहां कोई भी गतिविधि नेपाल के खिलाफ है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड May 04, 2026 पर 7:39 AM
Kailash Mansarovar Yatra: लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल को आपत्ति, भारत और चीन को दोटूक- 'यह हमारा इलाका है'
लिपुलेख दर्रा भारत, चीन (तिब्बत) और नेपाल को जोड़ने वाला एक रणनीतिक 'ट्राई-जंक्शन' है

Lipulekh Dispute Update: भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने की तैयारियों के बीच नेपाल ने कड़ा विरोध जताया है। नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा का क्षेत्र उसका संप्रभु हिस्सा है और बिना उसकी इजाजत के वहां से गुजरना नेपाल के कानून के खिलाफ है। इस आपत्ति ने एक बार फिर हिमालयी सीमा विवाद को चर्चा में ला दिया है।

नेपाल ने 'सुगौली संधि' का दिया हवाला

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भारत और चीन दोनों को अपनी स्थिति से अवगत कराया है। नेपाल का कहना है कि 1816 की सुगौली संधि के तहत महाकाली नदी के पूर्व के सभी क्षेत्र, जिनमें लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी शामिल हैं, नेपाल के क्षेत्र में आते हैं। काठमांडू ने कहा है कि उसने राजनयिक माध्यमों से नई दिल्ली और बीजिंग के सामने इस विवादित क्षेत्र में किसी भी गतिविधि, विशेषकर प्रस्तावित तीर्थयात्रा मार्ग को लेकर अपनी चिंताएं उठाई हैं। नेपाल ने भारत से इस क्षेत्र में किसी भी बुनियादी ढांचे, व्यापार या पर्यटन से संबंधित गतिविधि से बचने का आग्रह किया है।

लिपुलेख दर्रे का रणनीतिक और धार्मिक महत्व

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