नेपाल के पूर्व गृह मंत्री कमल थापा और कई अन्य लोगों को रविवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, पुलिस के अनुसार, इन लोगों को काठमांडू में राजशाही समर्थक प्रदर्शनों के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश करने के लिए गिरफ्तार किया गया। राजशाही समर्थक गुट आंदोलन के चौथे दिन नारायण चौर में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन का उद्देश्य नेपाल में राजशाही को फिर से वापस लाना और इसे हिंदू राज्य के रूप में स्थापित करना था।
नेपाल के अधिकारियों ने शुक्रवार को प्रदर्शनों के बीच काठमांडू के बीच नारायणहिती पैलेस एरिया के आसपास विरोध प्रदर्शन और सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
काठमांडू घाटी पुलिस के प्रवक्ता एपिल बोहोरा के अनुसार, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) के अध्यक्ष और राजशाही के प्रबल समर्थक राजेंद्र लिंगडेन विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे, जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेड को तोड़ने और प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास बलुवाटर की ओर मार्च करने की कोशिश की, तो पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई।
काठमांडू पोस्ट ने पुलिस के हवाले से बताया कि RPP-नेपाल के अध्यक्ष और नेपाल के पूर्व गृह मंत्री थापा को नारायण चौर इलाके में नारायणहिती पैलेस संग्रहालय एरिया के आसपास घोषित प्रतिबंधित क्षेत्र आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिया गया।
RPP और RPP-नेपाल समेत राजशाही समर्थक समूहों ने 29 मई से काठमांडू केंद्रित विरोध कार्यक्रम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य नेपाल में राजशाही की बहाली और हिंदू राज्य की स्थापना करना था। आज तक विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं।
बोहरा ने बताया कि करीब 1,200 राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारियों ने गणतंत्र प्रणाली के खिलाफ और राजशाही के पक्ष में नारे लगाए। उन्होंने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की तस्वीरें ले रखी थीं और प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
2008 में नेपाल के राजनीतिक दलों ने संसदीय प्रक्रिया के जरिए 240 साल पुरानी राजशाही को खत्म कर दिया था और पूर्व हिंदू राज्य को एक धर्मनिरपेक्ष, संघीय, लोकतांत्रिक गणराज्य में बदल दिया था। हालांकि, हाल के महीनों में काठमांडू और देश के कई दूसरे हिस्सों में राजशाही के समर्थन में विरोध प्रदर्शनों की लहर चल रही है।