Nepal Protest: Nepo Kid ट्रेंड से लेकर सोशल मीडिया बैन तक, नेपाल में क्यों सड़कों पर उतरे हैं युवा?

नेपाल में ये प्रदर्शन हिंसक हो गया, सड़कों पर उतरे युवा संसद भवन के भीतर तक घुस गए और सुरक्षा बलों ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए गोलियां भी चलाईं। इस दौरान 9 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और कुछ लोग घायल हो भी गए। न्यू बनेश्वर में झड़प के दौरान गोली लगने से घायल हुए एक प्रदर्शनकारी की इलाज के दौरान सिविल अस्पताल में मौत हो गई। घायलों में से कुछ की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है

अपडेटेड Sep 08, 2025 पर 4:01 PM
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Nepal Protest: नेपाल में क्यों सड़कों पर उतरे हैं युवा?

नेपाल की राजधानी काठमांडू में सोमवार को बड़ी संख्या में युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि सरकार सोशल मीडिया पर लगाया गया बैन हटाए और देश में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करे। पिछले हफ्ते नेपाल ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर पाबंदी लगा दी थी, क्योंकि वे तय समय सीमा में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाईं। आज ये प्रदर्शन हिंसक हो गया, सड़कों पर उतरे युवा संसद भवन के भीतर तक घुस गए और सुरक्षा बलों ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए गोलियां भी चलाईं।

इस दौरान 9 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और कुछ लोग घायल हो भी गए। न्यू बनेश्वर में झड़प के दौरान गोली लगने से घायल हुए एक प्रदर्शनकारी की इलाज के दौरान सिविल अस्पताल में मौत हो गई। घायलों में से कुछ की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।

Nepal Protest: नेपाल में क्यों सड़कों पर उतरे हैं युवा? Nepal Protest: संसद भवन के बाहर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों में झड़प


झापा के दमक में प्रदर्शनकारियों ने दमक चौक से नगर पालिका दफ्तर तक मार्च किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली का पुतला फूंका और नगरपालिका के गेट तोड़ने की कोशिश की। पुलिस ने रोकने के लिए रबर बुलेट चलाईं, जिससे एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। हालात तब और बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों ने कई मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर दिया।

उग्र प्रदर्शन को देखते हुए काठमांडू के कई इलाकों में रात 10.00 बजे तक के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया और सेना को भी तैनात किया गया है। जनता और खासकर नई पीढ़ी के युवा- Gen Z दो मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, पहला भ्रष्टाचार और दूसरा सोशल मीडिया पर बैन, आइए दोनों ही मुद्दों को बारीकी से समझने की कोशिश करते हैं।

कैसे हुई इसकी शुरुआत?

करीब दो साल पहले, तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्पा कमल दाहाल ‘प्रचंड’ की सरकार ने नेपाल में TikTok पर बैन लगाया था। सरकार का कहना था कि यह प्लेटफॉर्म "सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश" कर रहा है। हालांकि, जब के.पी. शर्मा ओली प्रधानमंत्री बने, तो उनकी सरकार ने प्रचंड सरकार की ओर से टिकटॉक पर लगाया गया बैन हटा दिया।

लेकिन उससे पहले, जब प्रचंड सरकार सत्ता में थी, तब सोशल मीडिया के इस्तेमाल को कंट्रोल करने के लिए एक गाइडलाइन जारी की गई थी। इसके बाद प्रधानमंत्री के.पी. ओली ने सत्ता संभाली और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नेपाली कानून के दायरे में लाने की कोशिश की। इसके लिए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को रजिस्ट्रेशन कराने की समय सीमा तय की थी।

सुप्रीम कोर्ट का वो फैसला

सरकार की सोशल मीडिया पर नई नीति पिछले साल अक्टूबर में आए सुप्रीम कोर्ट की ग्रैंड फुल बेंच के फैसले पर आधारित थी। यह फैसला अदालत की अवमानना से जुड़े एक मामले में आया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट के डिप्टी रजिस्ट्रार गोविंदा प्रसाद घिमिरे ने दाखिल किया था। इस मामले में Sidha Kura.com को भी पक्षकार बनाया गया था।

हाल ही में सार्वजनिक किए गए इस फैसले में कहा गया था कि देशी और विदेशी सभी ऑनलाइन व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नेपाल में अपना कामकाज करने से पहले संबंधित प्राधिकरण के पास अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

क्या हैं सरकार के नए नियम?

इसी फैसले के आधार पर सोशल मीडिया डायरेक्टिव्स 2080 में सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नेपाल में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। इसमें यह भी प्रावधान था कि जो प्लेटफॉर्म रजिस्ट्रेशन नहीं कराएंगे, उन्हें नेपाल में बंद किया जा सकता है।

निर्देश के अनुसार, नेपाल में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को एक मुख्य संपर्क व्यक्ति, एक शिकायत निवारण अधिकारी और एक अनुपालन अधिकारी रखना जरूरी था।

इस निर्देश में सोशल मीडिया यूजर्स और ऑपरेटरों की जिम्मेदारियों भी तय की गई थीं। इसके बाद संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय लगातार कंपनियों से नेपाल में रजिस्ट्रेशन कराने की अपील करता रहा।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल अगस्त से नोटिस जारी करके कंपनियों को रजिस्ट्रेशन के लिए कहा जा रहा था। इसके लिए कई सोशल मीडिया कंपनियों को ईमेल भी भेजे गए थे, ताकि वे नेपाल सरकार के फैसले को लागू करने में सहयोग करें।

इस बीच, सरकार बार-बार चेतावनी भी देती रही कि जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पंजीकरण नहीं करेंगे, उन्हें ब्लॉक कर दिया जाएगा।

युवाओं ने चलाया #Nepokid ट्रेंड

जब सरकार सोशल मीडिया कंपनियों को रजिस्ट्रेशन कराने में जुटी थी, उसी बीच एक और मुद्दा नेपाल में गरमा रहा था। कुछ युवाओं ने TikTok पर देश के नेताओं के बच्चों की "लग्जरी लाइफ" दिखाते हुए फोटो और वीडियो डालकर एक ट्रेंड शुरू किया- '#NepoKid’।

इन युवाओं का कहना था कि नेता सत्ता में आकर अपने बच्चों को फायदा पहुंचाते हैं, लेकिन देश के लिए काम नहीं करते। अभियान चलाने वालों ने युवाओं से अपील की कि वे देश में राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से जुड़ें। इसके लिए उन्होंने TikTok समेत बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लोगों से इसमें जुड़ने की अपील की।

सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और पोस्ट में डाले जाने लगे, जिनमें नेताओं के बच्चों की लग्जरी लाइफ और देश के दूर-दराज इलाकों में गरीबों की मुश्किल भरी जिंदगी की तुलना की जाने लगी।

इसी बीच सरकार ने गुरुवार 4 अगस्त को देशभर में Facebook, X, WhatsApp और Youtube जैसे 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा दिया और इस फैसले ने आग में घी का काम किया।

राजधानी काठमांडू में कर्फ्यू

जो युवा पहले से ही नेताओं के भ्रष्टाचार और उनके बच्चों की लेविश लाइफ को लेकर नाराज थे, उनका गुस्सा और भड़क गया। सोमवार को हजारों की तादाद में युवा सड़कों पर उतरे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया।

न्यू बनेश्वर की स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। पहले हुई झड़पों के बाद प्रशासन ने दोपहर 12:30 बजे से रात 10 बजे तक कर्फ्यू लगाया। यह कर्फ्यू बनेश्वर चौक से बिजुली बाजार पुल (पश्चिम), तीनकुने चौक (पूर्व), रत्न राज्य स्कूल (उत्तर) और शंखमुल पुल (दक्षिण) तक लागू रहा।

Nepal Protest 1

प्रदर्शनकारियों के प्रतिबंधित इलाकों और संसद में घुसने के बाद सेना को भी सुरक्षा बलों की मदद के लिए तैनात किया गया।

भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार, रबर बुलेट और हवाई फायर किया, लेकिन प्रदर्शनकारी लगातार टकराते रहे। अधिकारियों ने हालात को बेहद तनावपूर्ण बताया है।

काठमांडू और झापा के अलावा, युवाओं ने पोखरा, बुटवल, चितवन, नेपालगंज और बीराटनगर में भी प्रदर्शन किए, जहां उन्होंने भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बंद किए जाने के खिलाफ गुस्सा जताया।

Nepal Gen-Z Protest: नेपाल में बवाल! संसद भवन में घुसे प्रदर्शनकारी, सोशल मीडिया बैन के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवा

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