Nirav Modi Extradition: भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत के सबसे हाई-प्रोफाइल आर्थिक भगोड़े नीरव मोदी को जल्द ही भारत वापस लाया जा सकता है। सरकार के शीर्ष सूत्रों ने संकेत दिया है कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अपने फाइनल स्टेज में पहुंच गई है। सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीमें पहले ही लंदन पहुंच चुकी हैं। इससे साफ पता चलता है कि मोदी को वापस लाने के लिए ऑपरेशनल कदम तेजी से उठाए जा रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि यूनाइटेड किंगडम में ज्यादतर बड़ी कानूनी बाधाएं प्रभावी रूप से खत्म हो चुकी हैं। इससे उनके भारत लौटने का रास्ता साफ हो गया है। CBI टीमों की लंदन में तैनाती को इस बात के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि यह प्रक्रिया कानूनी कार्यवाही से आगे बढ़कर अपने आखिरी चरण में पहुंच गई है। नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े कई अरब डॉलर के धोखाधड़ी मामले का आरोप है।
यदि यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो यह सरकार के लिए एक बड़ी सफलता होगी। अधिकारियों के अनुसार, लगातार कानूनी और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से विदेशों में भगोड़ों का पीछा करने में सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड अब और मजबूत हुआ है। भारत लौटने पर नीरव मोदी को धोखाधड़ी मामले के संबंध में त्वरित सुनवाई का सामना करना पड़ सकता है।
मार्च में लंदन की एक अदालत ने नीरव मोदी की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उसने भारत में अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ कार्यवाही को फिर से खोलने की मांग की थी। वह फिलहाल लंदन की जेल में बंद है।
लंदन हाई कोर्ट से मोदी को झटका
मार्च में ब्रिटेन के 'हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस' ने मोदी की प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका पर फिर से सुनवाई की अपील को खारिज कर दिया था। इससे ब्रिटेन में नीरव मोदी के लिए सभी कानूनी रास्ते बंद हो गए। लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस जे की पीठ वाली 'हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस' ने दंड प्रक्रिया नियमों के तहत मोदी की अपने प्रत्यर्पण अपील को फिर से खोलने की याचिका को खारिज कर दिया था।
ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए पाया कि नीरव मोदी द्वारा दायर याचिका मामले को दोबारा खोलने के लिए आवश्यक असाधारण परिस्थितियों की कसौटी पर खरी नहीं उतरती। अदालत ने कहा कि कोर्ट में पेश आधार पर्याप्त नहीं थे। इसलिए पूर्व के फैसले पर पुनर्विचार करना उचित नहीं होगा।
लंदन की जेल में बंद है मोदी
मोदी की अपील को दोबारा खोलने की अर्जी हथियार कारोबारी संजय भंडारी के प्रत्यर्पण मामले में फरवरी 2025 के फैसले पर आधारित थी। इसमें अदालत ने भारतीय एजेंसियों द्वारा जबरन कबूलनामे हासिल करने के लिए यातना के इस्तेमाल को आम बात और व्यापक समस्या बताया था। अंतरराष्ट्रीय बुटीक स्टोर और कान फिल्म फेस्टिवल में उपस्थिति के कारण प्रसिद्ध हुआ यह 55 वर्षीय कारोबारी 19 मार्च, 2019 को ब्रिटेन में गिरफ्तारी के बाद से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है।
13,000 करोड़ के फर्जीवाड़े का आरोप
भारत में भगोड़ा घोषित मोदी पर अपने मामा मेहुल चोकसी (जो बेल्जियम की जेल में बंद हैं) के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक में 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले को अंजाम देने का आरोप है। सीबीआई के अनुसार, मोदी ने कुल गबन की गई राशि में से अकेले 6,498.20 करोड़ रुपये की धांधली की। सीबीआई द्वारा घोटाले की जांच शुरू करने से कुछ ही समय पहले वह जनवरी 2018 में भारत छोड़कर चले गए थे।
2019 में यूनाइटेड किंगडम में उनकी गिरफ्तारी के बाद ब्रिटिश अदालतों ने भारत में उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी। अदालतों ने मामले पर विचार करते हुए भारत में उनके साथ होने वाले व्यवहार के संबंध में दिए गए आश्वासनों को स्वीकार किया और उनके प्रत्यर्पण में कोई कानूनी बाधा नहीं पाई। इसके आधार पर उसकी पिछली अपीलें खारिज कर दी गईं।