काबुल में हुए बड़े हमले के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। यहां के एक नशा मुक्ति अस्पताल पर पाकिस्तान की सेना की तरफ से की गई एयर स्ट्राइक के बाद मलबे में अब भी 50 से ज्यादा लोगों के दबे होने की आशंका है। राहत और बचाव का काम लगातार जारी है। अफगानिस्तान की ओर से दिए गए दावों के मुताबिक शुरुआती तौर पर इस हमले में करीब 400 लोगों की मौत हो गई, जबकि 250 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। ये सभी लोग अस्पताल में इलाज करा रहे थे। हमले में अस्पताल के 5 बड़े हिस्से पूरी तरह तबाह हो गए, जहां करीब 3,000 मरीज इलाज के लिए रह रहे थे।
अफगान तालिबान सरकार के गृह मंत्रालय के डिप्टी मंत्री मोहम्मद नबी ओमारी ने मौके पर पहुंचकर कहा कि पाकिस्तान “अफगानों को मारने की साजिश” के तहत काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अफगान सरकार अपने लोगों की रक्षा करने में सक्षम है और इस हमले का जवाब दे सकती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफत जमान अमरखेल ने बताया कि अब तक देश के 5 स्वास्थ्य केंद्रों को निशाना बनाया जा चुका है।
दूसरी ओर, जिन लोगों के परिवार के सदस्य इस अस्पताल में भर्ती थे, वे वजीर मोहम्मद अकबर खान अस्पताल और इमरजेंसी अस्पताल के बाहर इकट्ठा होकर अपने अपनों की तलाश कर रहे हैं। कई लोगों को अभी तक अपने परिवार वालों का कोई पता नहीं चल पाया है।
फोरेंसिक विभाग के प्रमुख नजीबुल्लाह फारूकी के अनुसार अब तक 98 शव विभाग में लाए जा चुके हैं, जिनमें से ज्यादातर की पहचान हो गई है। उन्होंने बताया कि शवों को वापस घटना स्थल ले जाकर परिवारों को सौंपा जाएगा।
कुछ लोग हमले के तुरंत बाद ही अपने परिजनों के शव लेकर चले गए थे।
डिप्टी मंत्री ओमारी ने पीड़ित परिवारों से अपील की है कि सभी मृतकों को एक ही कब्रिस्तान में दफनाया जाए, ताकि यह घटना हमेशा के लिए याद रहे।
देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों ने कहा है कि वे अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हैं और सुरक्षा बलों के साथ खड़े रहेंगे।
वहीं, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई समेत कई पूर्व अधिकारियों और खिलाड़ियों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।