घर में नहीं हैं दाने, पाकिस्तान चला भुनाने! सिर पर 2.5 अरब डॉलर कर्ज, फिर भी 1 अरब डॉलर देकर ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में होगा शामिल
आलम ये है कि जहां एक तरफ पाकिस्तान UAE से लिए गए 2.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुकाने और IMF को खुश रखने की कोशिश कर रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ शांति का वादा करने वाले एक बोर्ड का स्थायी सदस्य बनने के लिए करीब 1 अरब डॉलर भी खर्च कर रहा है
सिर पर 2.5 अरब डॉलर कर्ज, फिर भी 1 अरब डॉलर देकर ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होगा पाकिस्तान
पाकिस्तान ने ऐलान किया है कि वो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बनाए गए नए "बोर्ड ऑफ पीस" में शामिल होगा, जो युद्ध की मार झेल रहे गाजा में स्थायी युद्धविराम और पुनर्निर्माण को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक राजनयिक पहल है। यह कदम ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान खुद ही आर्थिक उथल-पुथल से जूझ रहा है और खाड़ी देशों के अपने साझेदारों से कुछ वित्तीय मदद हासिल करन में लगा है।
आलम ये है कि जहां एक तरफ पाकिस्तान UAE से लिए गए 2.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुकाने और IMF को खुश रखने की कोशिश कर रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ शांति का वादा करने वाले एक बोर्ड का स्थायी सदस्य बनने के लिए करीब 1 अरब डॉलर भी खर्च कर रहा है।
1 अरब डॉलर का ‘शांति’ आयोग
‘शांति बोर्ड’ में आठ इस्लामी देश शामिल हैं, और पाकिस्तान अब आधिकारिक तौर पर उनमें से एक है। विदेश मंत्री इशाक डार ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह गाजा शांति योजना के प्रति देश के समर्थन के अनुरूप है। द ट्रिब्यून के अनुसार, उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि यह बोर्ड स्थायी युद्धविराम लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने में मदद करेगा।”
वहीं, आलोचकों की नजरों में एक विडंबना साफ झलकती है। एक तरफ पाकिस्तान UAE से अरबों डॉलर का कर्ज माफ करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक महंगे अंतरराष्ट्रीय शांति क्लब का सदस्य बन गया है।
पाकिस्तान अभी भी अपने 7 अरब डॉलर के लोन प्रोग्राम के लिए IMF से समर्थन मांग रहा है, जो इस बात की याद दिलाता है कि उसकी अर्थव्यवस्था उसकी विदेश नीति की महत्वाकांक्षाओं से कहीं ज्यादा कमजोर हो सकती है।
कूटनीति और घरेलू संकट का टकराव
यह घोषणा ऐसे समय हुई, जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के 56वें वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 के लिए दावोस गए थे। ऐसी उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मुनीर शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप से मुलाकात करेंगे।
हाल के सालों में पाकिस्तान का कर्ज तेजी से बढ़ा है, फिर भी वो "स्थायी शांति" के लिए बनाए गए एक बोर्ड में अपनी जगह को प्राथमिकता दे रहा है। इस विडंबना के बावजूद, इस्लामाबाद का कहना है कि यह कदम वैश्विक कूटनीति में शामिल होने की उसकी तत्परता को दर्शाता है।
क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस'?
'बोर्ड ऑफ पीस' राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से शुरू की गई एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था है। इसकी औपचारिक घोषणा 15 जनवरी 2026 को की गई थी। शुरुआत में इसे केवल गाजा युद्ध को खत्म करने और वहां शांति बहाल करने के लिए बनाया गया था, लेकिन अब इसका लक्ष्य दुनिया भर के दूसरे संघर्षों (जैसे यूक्रेन-रूस युद्ध) को सुलझाना भी है।
इसका मुख्य काम क्या होगा?
युद्ध के बाद गाजा में शासन चलाने, वहां निवेश लाने और इंफ्रास्ट्रक्चर फिर से खड़ा करने की जिम्मेदारी इसी बोर्ड की होगी। यह बोर्ड गाजा में एक 'ट्रांजिशनल एडमिनिस्ट्रेशन' (अस्थाई प्रशासन) की तरह काम करेगा, जब तक कि वहां कोई स्थिर सरकार नहीं बन जाती।
इसके अलावा यह दुनिया के अलग-अलग कोनों में चल रहे युद्धों में मध्यस्थ की भूमिका भी निभाएगा।
बोर्ड के प्रमुख सदस्य
ट्रंप ने इस बोर्ड के लिए दुनिया के कुछ सबसे प्रभावशाली और अपने वफादार लोगों को चुना है:
डोनाल्ड ट्रंप: खुद इसके 'आजीवन चेयरमैन' रह सकते हैं।
जारेड कुशनर: ट्रंप के दामाद, जिन्होंने पहले भी 'अब्राहम समझौता' कराने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
टोनी ब्लेयर: ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री।
अजय बंगा: वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष।
मार्को रूबियो: अमेरिका के विदेश मंत्री।
"UN को रिप्लेस करने की कोशिश?"
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) की जगह ले सकता है। ट्रंप का मानना है कि UN दुनिया की समस्याओं को सुलझाने में नाकाम रहा है। उन्होंने यहां तक कहा है, "UN ने मेरी कभी मदद नहीं की, शायद मेरा बोर्ड इसकी जगह ले ले।"
अजीबोगरीब शर्तें और सदस्यता
ट्रंप ने करीब 60 देशों को इसमें शामिल होने का न्योता दिया है।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, बोर्ड में 'स्थायी सदस्यता' पाने के लिए देशों को 1 अरब डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपए) देने पड़ सकते हैं। पाकिस्तान, UAE, और अर्जेंटीना जैसे देशों ने इसमें शामिल होने की दिलचस्पी दिखाई है।
वहीं बुधवार को जारी एक संयुक्त बयान में, कतर, तुर्की गणराज्य, मिस्र अरब गणराज्य, जॉर्डन हाशमी साम्राज्य, इंडोनेशिया गणराज्य, पाकिस्तान इस्लामी गणराज्य, सऊदी अरब साम्राज्य और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने बोर्ड में शामिल होने के ट्रंप के न्योते का स्वागत किया।
बयान में आगे कहा गया, "मंत्रियों ने शांति बोर्ड में शामिल होने के अपने देशों के साझा निर्णय की घोषणा की है। प्रत्येक देश अपने संबंधित कानूनी और बाकी जरूरी प्रक्रियाओं के अनुसार शामिल होने के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेगा, जिसमें मिस्र अरब गणराज्य, पाकिस्तान इस्लामी गणराज्य और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं, जिन्होंने पहले ही शामिल होने की घोषणा कर दी है।"