भारत की तरफ से सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के फैसले पर पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत के इस कदम से उसके यहां जल सुरक्षा संकट गहरा गया है और इससे क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा पैदा हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रतिनिधि उस्मान जादून ने भारत के फैसले को “पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल” करने वाला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत का यह कदम 1960 में हुई सिंधु जल संधि का उल्लंघन है, जिसे संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में लागू किया गया था।
भारत ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। इस हमले को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक गुट ने अंजाम दिया था।
कनाडा में आयोजित ग्लोबल वॉटर बैंकरप्सी पॉलिसी राउंडटेबल में बोलते हुए जादून ने आरोप लगाया कि भारत ने संधि के कई प्रावधानों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने बिना सूचना दिए नीचे की ओर जाने वाले पानी के फ्लो में रुकावट डाली और अहम जल संबंधी आंकड़े साझा करना बंद कर दिया।
संधि के अनुसार, भारत को सिंधु नदी सिस्टम की पूर्वी नदियों- सतलुज, ब्यास और रावी- के पानी का पूरा इस्तेमाल करने का अधिकार है। वहीं पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब- का पानी मिलता है।
23 अप्रैल से भारत ने पाकिस्तान को नदियों से जुड़ा बाढ़ अलर्ट भेजना बंद कर दिया है। यह जानकारी हर साल खासतौर पर 1 जुलाई से 10 अक्टूबर के बीच साझा की जाती थी। इसके अलावा, खरीफ और रबी फसलों से जुड़े कुछ सिंचाई आंकड़े भी अब साझा नहीं किए जा रहे हैं।
पाकिस्तानी राजदूत ने कहा कि सिंधु जल संधि अब तक नदी घाटी के न्यायपूर्ण और स्थिर प्रबंधन का एक भरोसेमंद ढांचा रही है। उन्होंने बताया कि यह नदी प्रणाली पाकिस्तान की 80 प्रतिशत से ज्यादा कृषि जरूरतों को पूरा करती है और करीब 24 करोड़ लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में पानी की कमी एक कड़वी सच्चाई है। देश पहले से ही बाढ़, सूखा, ग्लेशियर पिघलने, भूजल स्तर गिरने और तेजी से बढ़ती आबादी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, जिससे जल संसाधनों पर भारी दबाव पड़ रहा है।
भारत के फैसले से पाकिस्तान की जल संबंधी कमजोरियां और उजागर हो गई हैं, खासकर इसलिए क्योंकि वह पानी को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं कर पाया है।
पिछले साल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी भारत के कदम के बाद जल सुरक्षा से निपटने के लिए प्रांतों से ठोस कदम उठाने की अपील की थी।
वहीं भारत ने साफ कर दिया है कि यह फैसला पाकिस्तान से आने वाले आतंकवाद के खिलाफ उसकी नई नीति का हिस्सा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद 12 मई को दिए गए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जब तक पाकिस्तान अपने यहां छिपे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि पर कोई बातचीत नहीं होगी। उन्होंने दो टूक कहा था कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।”