कंगाली में पाकिस्तान की सेना ने PM शहबाज शरीफ से कर दी पसीने छुड़ाने वाली डिमांड! ये ऐसे करेंगे भारत का मुकाबला

Pakistan Military Budget Hike: इस्लामाबाद में मौजूद IMF की टीम ने पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य खर्च पर सख्त आपत्ति जताई है। आईएमएफ ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि कमजोर आर्थिक स्थिति के बीच रक्षा बजट में अंधाधुंध बढ़ोतरी करने से देश के आर्थिक सुधार कार्यक्रम को झटका लगेगा और वह खुद को कंगाल होने से नहीं बचा पाएगा

अपडेटेड May 18, 2026 पर 2:16 PM
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सेना की जिद ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पसीने छुड़ा दिए हैं

Pakistan Defence Budget: अपनी बदहाल अर्थव्यवस्था और कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान में एक बार फिर सेना और सरकार के बीच ठन गई है। ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी के ठीक बाद, पाकिस्तान की सेना ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट में भारी-भरकम बढ़ोतरी की मांग की है।

'सीएनएन-न्यूज18' की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना ने अपने रक्षा बजट में 20 से 25 फीसदी के बंपर इजाफे की मांग की है। सेना की इस जिद ने शहबाज शरीफ सरकार के पसीने छुड़ा दिए हैं, क्योंकि इस वक्त अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की एक टीम बजट फ्रेमवर्क की निगरानी के लिए इस्लामाबाद में ही डेरा डाले बैठी है।

कंगाली में आटा गीला


पाकिस्तान इस समय इतिहास के सबसे खराब आर्थिक दौर से गुजर रहा है। देश पर भारी विदेशी कर्ज है, विदेशी मुद्रा भंडार वेंटिलेटर पर है, महंगाई आसमान छू रही है और पड़ोसी देश ईरान में जारी युद्ध ने उसकी बची-खुची कमर भी तोड़ दी है।

इसके बावजूद जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व वाली सेना अपनी सुख-सुविधाओं और हथियारों के लिए बजट बढ़ाने पर अड़ी है। बता दें कि पिछले वित्त वर्ष (FY26) में भी कंगाली और भारी महंगाई के बावजूद पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में 20% की बढ़ोतरी की थी।

शहबाज सरकार को IMF ने लगाई फटकार

इस्लामाबाद में मौजूद IMF की टीम ने पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य खर्च पर सख्त आपत्ति जताई है। आईएमएफ ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि कमजोर आर्थिक स्थिति के बीच रक्षा बजट में अंधाधुंध बढ़ोतरी करने से देश के आर्थिक सुधार कार्यक्रम को झटका लगेगा और वह खुद को कंगाल होने से नहीं बचा पाएगा। वहीं पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, सरकार के लिए सेना की इस मांग को पूरा करना नामुमकिन जैसा है।

आईएमएफ के इस कड़े रुख को देखते हुए वित्त मंत्रालय के अधिकारी सेना के बजट में केवल 5 से 7 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।

आईएमएफ की इन शर्तों के बीच फंसे शहबाज शरीफ

अगले महीने पाकिस्तान का केंद्रीय बजट पेश होना है। इस समय शहबाज सरकार दो पाटों के बीच पिस रही है- एक तरफ देश की हुकूमत चलाने वाली शक्तिशाली फौज का दबाव है, तो दूसरी तरफ कर्ज की किश्तें देने वाला आईएमएफ। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष लगातार पाकिस्तान पर इन फैसलों को अपनाने का दबाव बना रहा है:

  • अपने टैक्स के दायरे को बढ़ाए और रईसों पर टैक्स लगाए।
  • गैर-जरूरी खर्चों जैसे- रक्षा और वीआईपी कल्चर में भारी कटौती करे।
  • सब्सिडी खत्म करे और विकास कार्यों पर ध्यान दे।

वैसे पाकिस्तान पिछले कई सालों से सिर्फ आईएमएफ के बेलआउट पैकेज और भीख के भरोसे डिफ़ॉल्ट होने से बचता आ रहा है। ऐसे समय में जब देश की जनता रोटी और बिजली के बिल के लिए तरस रही है, फौज का 25% बजट बढ़ाने की मांग ने देश में हलचल पैदा कर दी है।

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