Shehbaz Sharif: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को संघीय कैबिनेट की बैठक में एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि मई 2025 में भारत के साथ हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष के बाद पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों, विशेष रूप से JF-17 थंडर की मांग में वैश्विक स्तर पर जबरदस्त उछाल आया है। शरीफ के अनुसार, कई देश इन विमानों को खरीदने के लिए पाकिस्तान के साथ 'सक्रिय' रूप से बातचीत कर रहे हैं, जिससे देश की रक्षा अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
किन देशों की है दिलचस्पी?
हालांकि प्रधानमंत्री ने आधिकारिक तौर पर देशों के नाम नहीं लिए, लेकिन स्थानीय मीडिया और रक्षा सूत्रों के अनुसार निम्नलिखित देशों के साथ बातचीत उन्नत चरणों में है।
प्रमुख दावेदार: सऊदी अरब, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, इराक, सूडान और लीबिया।
सऊदी अरब के साथ डील: रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान और सऊदी अरब $2 बिलियन के सऊदी कर्ज को JF-17 लड़ाकू विमान सौदे में बदलने पर चर्चा कर रहे हैं।
इंडोनेशिया: इंडोनेशियाई रक्षा मंत्री ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा किया और 40 से अधिक JF-17 जेट और 'शाहपर' ड्रोन्स में रुचि दिखाई है।
अन्य विमान: लड़ाकू विमानों के अलावा, मुशशाक ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट और 'तैमूर' वेपन सिस्टम की भी मांग बढ़ी है।
कम कीमत है JF-17 का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट
रक्षा उत्पादन मंत्री रजा हयात हरज ने BBC उर्दू को दिए इंटरव्यू में विमान की कीमत को इसकी सफलता का मुख्य कारण बताया। जहां वैश्विक स्तर पर आधुनिक लड़ाकू विमानों की कीमत $250-350 मिलियन के बीच होती है, वहीं JF-17 की कीमत मात्र $40-50 मिलियन (लगभग ₹330-420 करोड़) के आसपास है। इस विमान को पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) और चीन के चेंगदू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री ने मिलकर विकसित किया है। हरज ने स्पष्ट किया कि किसी भी निर्यात सौदे में चीन की सहमति अनिवार्य है।
'फ्रेंडली' देशों को ही मिलेगी सप्लाई
पाकिस्तान सरकार ने अपनी रक्षा निर्यात नीति पर कड़े रुख के संकेत दिए है। मंत्री हरज के अनुसार, JF-17 केवल उन 'मित्र देशों' को बेचे जाएंगे जो पाकिस्तान के हितों के खिलाफ इनका उपयोग नहीं करेंगे। पाकिस्तान इस निर्यात सफलता के जरिए अपनी गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने और IMF के कर्ज पर निर्भरता कम करने की उम्मीद कर रहा है।