2024 में पाकिस्तान ने अपने करीबी सहयोगी चीन से समुद्र आधारित परमाणु जवाबी हमला करने की क्षमता यानी “सी-बेस्ड न्यूक्लियर सेकंड-स्ट्राइक कैपेबिलिटी” मांगी थी। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने यह मांग ठुकरा दी। Drop Site News की तरफ से जारी कथित गोपनीय दस्तावेजों के अनुसार, बीजिंग ने पाकिस्तान की मांग को “अनुचित” बताया और कहा कि ऐसी तकनीक देना दक्षिण एशिया में सीधे परमाणु प्रसार में शामिल होने जैसा होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान चाहता था कि चीन उसे ऐसी परमाणु क्षमता दे जिससे अगर दुश्मन पहले हमला कर दे, तब भी पाकिस्तान समुद्र से परमाणु जवाबी हमला कर सके।
इसके लिए परमाणु मिसाइल ले जाने वाली खास पनडुब्बियां चाहिए होती हैं, जिन्हें SSBN परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां कहा जाता है। ये समुद्र में छिपी रहती हैं और इन्हें ढूंढना बेहद मुश्किल होता है।
यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे ताकतवर परमाणु सुरक्षा प्रणालियों में गिना जाता है।
ग्वादर पोर्ट को लेकर भी शर्तें
दस्तावेजों में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने ग्वादर पोर्ट को स्थायी चीनी सैन्य अड्डे में बदलने के बदले कई शर्तें रखीं।
बताया गया कि पाकिस्तान ने चीन से मांग की थी कि अगर इस कदम पर अमेरिका राजनीतिक, आर्थिक या कूटनीतिक दबाव बनाता है, तो बीजिंग उसकी सुरक्षा की गारंटी दे।
इसके अलावा पाकिस्तान ने भारत के मुकाबले अपनी सैन्य और खुफिया क्षमता बनाए रखने के लिए चीन से सैन्य आधुनिकीकरण में मदद भी मांगी।
आखिर “सेकंड-स्ट्राइक कैपेबिलिटी” क्या होती है?
सीधे शब्दों में समझें तो अगर किसी देश पर पहले परमाणु हमला हो जाए, तब भी वह जवाब में परमाणु हमला कर सके — यही “सेकंड-स्ट्राइक कैपेबिलिटी” कहलाती है।
इसका सबसे मजबूत तरीका समुद्र में छिपी परमाणु पनडुब्बियां मानी जाती हैं। दुश्मन इन्हें आसानी से नष्ट नहीं कर सकता, इसलिए यह दुश्मन को पहले हमला करने से रोकने का बड़ा हथियार बन जाती हैं।
किन देशों के पास यह ताकत है?
दुनिया में अभी बहुत कम देशों के पास यह क्षमता है।
इसके अलावा इजरायल के बारे में भी माना जाता है कि उसके पास सीमित क्षेत्रीय सेकंड-स्ट्राइक क्षमता मौजूद है।