PM Modi in China: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में एक साथ मंच पर होंगे। दुनिया की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है, क्योंकि यह तीनों नेता ऐसे समय में मिल रहे हैं जब डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने टैरिफ, भारत और चीन के खिलाफ छेड़े गए ट्रेड वॉर, और रूस पर सख्त प्रतिबंधों की आशंकाओं ने वैश्विक व्यवस्था को हिला दिया है।
अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी को काउंटर करने पर होगी बातचीत
वैश्विक व्यवस्था में अस्थिरता के बीच तीनों नेताओं का एक मंच पर आना अमेरिकी राष्ट्रपति को एक कड़ा संदेश देगा, जिन्होंने टैरिफ की अपनी रणनीति से इन तीनों देशों पर दबाव बनाने की पुरजोर कोशिश की है। प्रधानमंत्री मोदी सात साल बाद चीन की यात्रा पर हैं। वह इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान शी जिनपिंग और पुतिन के साथ अहम द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। पीएम मोदी आज जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे, जबकि कल पुतिन के साथ उनकी बैठक होगी।
भारत के रुख पर अमेरिका की नाराजगी
ट्रंप प्रशासन ने रूस के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों को लेकर उस पर 50% टैरिफ लगाकर नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को हाशिये पर ला दिया है। भारत के रूसी तेल खरीद को जारी रखने को लेकर व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने भारत पर कई बार हमला किया है। उन्होंने नई दिल्ली पर 'यूक्रेन में मॉस्को की युद्ध मशीन को बढ़ावा देने' का आरोप तक लगाया है। ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने तो यहां तक दावा किया कि यूक्रेन युद्ध 'मोदी का युद्ध' है।
हालांकि, भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है और वह किसी भी दबाव में नहीं आएगा। भारत, चीन के बाद रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। वॉशिंगटन ने इसके लिए भारत पर टैरिफ लगाए हैं, जबकि बीजिंग पर ऐसा कोई शुल्क नहीं लगाया गया है।
बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत-चीन की भूमिका
हाल के महीनों में भारत और चीन अपने संबंधों को फिर से सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। पीएम मोदी की चीन यात्रा को संबंधों को बेहतर बनाने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है, खासकर जब दोनों देशों पर अमेरिका का व्यापारिक दबाव बढ़ रहा है। भारत और चीन दोनों ही एक बहुध्रुवीय दुनिया की वकालत करते रहे हैं, जो अमेरिका के वैश्विक प्रभुत्व की अवधारणा के खिलाफ है। इस संदर्भ में, जिनपिंग और पुतिन के साथ प्रधानमंत्री की बैठकें और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं, क्योंकि ये तीनों देश 'अमेरिका की धमकियों' के खिलाफ एकजुटता दिखाने पर नजर गड़ाए हुए हैं।