Israel-Iran War: खामेनेई की मौत के बाद अलीरेजा अराफी को बनाया गया ईरान का सुप्रीम लीडर

Israel-Iran War : सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान के वरिष्ठ धर्मगुरु अलीरेजा अराफी को देश की लीडरशिप काउंसिल का सदस्य बनाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अलीरेज़ा अराफी पहले से ही गार्डियन काउंसिल के सदस्य हैं। अब वे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और न्यायपालिका प्रमुख घोलमहुसैन मोहसेनी एजेई के साथ मिलकर लीडरशिप काउंसिल में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे

अपडेटेड Mar 01, 2026 पर 4:26 PM
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अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव अब खुली जंग का रूप लेता नजर आ रहा है।

Israel-Iran War :  ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग काफी भीषण हो गया है। अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो चुकी है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनई की मौत के बाद सीनियर धर्मगुरु अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाया गया है।

अलीरेजा अराफी बने ईरान के लीडर

एक्सपीडिएंसी डिस्कर्नमेंट काउंसिल के प्रवक्ता के मुताबिक, सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान के वरिष्ठ धर्मगुरु अलीरेजा अराफी को देश की लीडरशिप काउंसिल का सदस्य बनाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अलीरेज़ा अराफी पहले से ही गार्डियन काउंसिल के सदस्य हैं। अब वे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और न्यायपालिका प्रमुख घोलमहुसैन मोहसेनी एजेई के साथ मिलकर लीडरशिप काउंसिल में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। यह काउंसिल देश के नेतृत्व से जुड़े अहम फैसलों में भूमिका निभाएगी।


अलीरेजा अराफी कौन हैं?

अलीरेजा अराफी ईरान के वरिष्ठ शिया धर्मगुरु हैं और देश की धार्मिक व राजनीतिक व्यवस्था में एक प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। उनका जन्म साल 1959 में ईरान के यज़्द प्रांत के मेबोद शहर में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध धार्मिक परिवार से आते हैं और पिछले कई दशकों में ईरान के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में अहम पदों तक पहुंचे हैं। अराफी को दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का करीबी माना जाता रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, वे उन प्रभावशाली धर्मगुरुओं के समूह का हिस्सा हैं, जिनकी ईरान की सत्ता व्यवस्था में मजबूत पकड़ मानी जाती है।

वर्तमान में अलीरेज़ा अराफी गार्डियन काउंसिल के सदस्य हैं। यह संस्था काफी शक्तिशाली मानी जाती है और चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की जांच करने के साथ-साथ चुनाव प्रक्रिया की निगरानी भी करती है। इसके अलावा वे असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के भी सदस्य हैं, जो ईरान के सुप्रीम लीडर की नियुक्ति करने और उनके कामकाज पर नजर रखने वाली अहम धार्मिक संस्था है। उन्होंने ईरान के इस्लामिक मदरसों के नेटवर्क को भी लीड किया है और क़ोम में शुक्रवार की नमाज़ के लीडर के तौर पर काम किया है, जिससे देश के धार्मिक संस्थानों में उनका काफी असर है।

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