जापान में टोक्यो मेट्रोपॉलिटन सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए 4 डे वर्क वीक लागू कर दिया है, यानि कि सप्ताह में केवल 4 दिन काम। ऐसा इसलिए ताकि वर्क-लाइफ बैलेंस में सुधार हो सके और जापान की घटती जन्म दर को बढ़ाया जा सके। यह उपाय वर्किंग पेरेंट्स को सपोर्ट करने और देश की तेजी से बढ़ती उम्रदराज आबादी द्वारा उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए एक बड़े पैमाने की पहल का हिस्सा है। दिसंबर 2024 में खबर आई थी कि टोक्यो मेट्रोपॉलिटन सरकार अप्रैल 2025 से अपने कर्मचारियों को सप्ताह में केवल 4 दिन काम करने की इजाजत देने जा रही है।
छोटे वर्क वीक के अलावा, टोक्यो प्रशासन ने एक नई "चाइल्डकेयर पार्शियल लीव" शुरू की है। इस स्कीम के तहत, वर्किंग पेरेंट्स को अपने काम के घंटों को रोज दो घंटे घटाने की इजाजत होगी। इससे बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी को मैनेज करने में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी।
ताकि महिलाओं को परिवार और करियर में से न चुनना पड़े कोई एक
टोक्यो की गवर्नर युरिको कोइके का कहना है कि इस कदम का लक्ष्य उन कर्मचारियों की मदद करना है जो माता-पिता हैं और बच्चों की देखभाल और काम के बीच संतुलन बनाना चाहते हैं। साथ ही महिलाओं को अपनी प्रोफेशनल आकांक्षाओं और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के बीच चुनाव करने से रोकना है। दिसंबर की जापान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोइके ने टोक्यो मेट्रोपॉलिटन असेंबली के रेगुलर सेशन के दौरान एक भाषण में कहा, "हम फ्लेक्सिबल तरीके से वर्क स्टाइल्स का रिव्यू करना जारी रखेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि महिलाओं को बच्चे के जन्म या बच्चे के पालन-पोषण जैसे लाइफ ईवेंट्स के चलते अपने करियर का त्याग न करना पड़े।"
2024 की शुरुआत में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी जन्म दर
जापान जनसंख्या संकट का सामना कर रहा है। जन्म दर साल 2024 की शुरुआत में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी। स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्रालय के अनुसार, जनवरी से जून 2024 तक देश में केवल 350,074 जन्म दर्ज किए गए, जो 2023 में इसी अवधि के आंकड़ों से 5.7% कम हैं। जापान की कुल प्रजनन दर यानि फर्टिलिटी रेट 2023 में 1.2 थी, और राजधानी टोक्यो में जन्म दर 0.99 से भी कम थी। फर्टिलिटी रेट एक महिला के जीवनकाल में बच्चों की संख्या को दर्शाती है। फॉर्च्यून की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के अनुसार, व्यापक रूप से स्थिर जनसंख्या को बनाए रखने के लिए 2.1 की जन्म दर की जरूरत होती है।
जापान में जैसे-जैसे बुज़ुर्ग नागरिकों का अनुपात बढ़ता जा रहा है, देश को अपनी वर्कफोर्स और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने में बढ़ती कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 8 वर्षों में जन्म दर में लगातार गिरावट आई है, जो दर्शाता है कि मौजूदा नीतियों को जनसांख्यिकीय गिरावट को रोकने में सीमित सफलता मिली है। सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के अनुसार, एक जापानी नागरिक की औसत आयु 49.9 है। अमेरिका में औसत आयु 38.9 है।
महिलाओं पर घर की जिम्मेदारियों का ज्यादा बोझ भी कम जन्म दर की एक वजह
जापान की कम फर्टिलिटी रेट में योगदान देने वाला एक प्रमुख फैक्टर घरेलू जिम्मेदारियों में लैंगिक असमानता का बरकरार होना है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के डेटा से पता चलता है कि जापानी महिलाएं, पुरुषों की तुलना में 5 गुना ज्यादा अनपेड घरेलू काम करती हैं। इसमें न केवल बच्चों की देखभाल बल्कि बुज़ुर्गों की देखभाल भी शामिल है। इससे महिलाओं पर पारिवारिक जीवन और करियर में उन्नति के बीच चयन करने का दबाव और बढ़ जाता है।
टोक्यो मेट्रोपॉलिटन सरकार ने उम्मीद जताई कि 4 डे वर्क वीक से पुरुषों और महिलाओं के बीच अनपेड घरेलू काम का ज्यादा बैलेंस्ड डिस्ट्रीब्यूशन होगा। इंटरनेशनल स्टडीज से पता चला है कि काम के घंटे कम होने से पुरुषों को घरेलू जिम्मेदारियों का ज्यादा हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। एक ट्रायल में सामने आया कि 4 डे वर्क वीक के शेड्यूल के तहत काम करने पर पुरुष, बच्चों की देखभाल पर 22% ज्यादा और घर के कामों पर 23% ज्यादा वक्त बिताते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने 4 डे वर्क वीक को एक यूनिवर्सल उपाय के रूप में देखने के खिलाफ चेतावनी दी है।