2026 में और सख्त होगी ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी, बड़ी संख्या में डिपोर्टेशन की तैयारी; राष्ट्रपति की लोकप्रियता घटी
Trump immigration policy: 2026 में ट्रंप प्रशासन इमिग्रेशन पर और सख्ती करने जा रहा है। अरबों डॉलर की फंडिंग, वर्कप्लेस रेड और बड़े पैमाने पर डिपोर्टेशन की तैयारी है। लेकिन, इसी मुद्दे पर राष्ट्रपति की लोकप्रियता लगातार गिरती नजर आ रही है। समझिए पूरा मामला।
ट्रंप सरकार सार्वजनिक तौर पर कहती रही है कि कार्रवाई अपराधियों पर केंद्रित है।
Trump immigration policy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2026 में इमिग्रेशन को लेकर और ज्यादा सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए सरकार अरबों डॉलर की नई फंडिंग देने जा रही है। इस प्लान में दफ्तरों, फैक्ट्रियों और दूसरी वर्कप्लेस पर छापेमारी भी शामिल है। यह सब ऐसे वक्त हो रहा है, जब अगले साल होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले इस नीति के खिलाफ विरोध भी तेज होता जा रहा है।
बड़े शहरों में पहले ही बढ़ चुकी है सख्ती
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन पहले ही अमेरिका के कई बड़े शहरों में बड़ी संख्या में इमिग्रेशन एजेंट भेज चुका है। इन एजेंट्स ने कई इलाकों में छापे मारे, जिससे कई जगह स्थानीय लोगों से टकराव भी हुआ।
इस साल कुछ हाई-प्रोफाइल बिजनेस रेड जरूर हुई हैं। लेकिन, अब तक सरकार ने फार्म, फैक्ट्रियों और उन सेक्टर्स को काफी हद तक छोड़ा था, जो अर्थव्यवस्था के लिए अहम हैं। साथ ही, जहां बड़ी संख्या में बिना कानूनी दर्जे वाले इमिग्रेंट काम करते हैं।
170 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग
इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) और बॉर्डर पेट्रोल को सितंबर 2029 तक 170 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग मिलने जा रही है। यह मौजूदा करीब 19 अरब डॉलर के सालाना बजट के मुकाबले बहुत बड़ी बढ़ोतरी है। जुलाई में रिपब्लिकन-नियंत्रित कांग्रेस ने इस बड़े खर्च वाले पैकेज को मंजूरी दी थी।
सरकार का कहना है कि इस पैसे से हजारों नए एजेंट्स की भर्ती होगी। नए डिटेंशन सेंटर खोले जाएंगे। लोकल जेलों से ज्यादा इमिग्रेंट्स को हिरासत में लिया जाएगा। साथ ही, बाहरी कंपनियों की मदद से बिना कानूनी स्टेटस वाले लोगों को ट्रैक किया जाएगा।
मिडटर्म चुनाव से पहले बढ़ रही नाराजगी
डिपोर्टेशन प्लान का यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है, जब इसके खिलाफ राजनीतिक प्रतिक्रिया साफ दिखने लगी है। मियामी ट्रंप की सख्ती से सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में रहा है, जहां इमिग्रेंट आबादी काफी ज्यादा है।
यहां हाल ही में लगभग तीन दशकों बाद पहली बार एक डेमोक्रेट मेयर चुना गया। मेयर-इलेक्ट के मुताबिक, यह नतीजा काफी हद तक राष्ट्रपति की नीतियों के खिलाफ प्रतिक्रिया का संकेत है। दूसरे शहरों के चुनाव और सर्वे भी दिखाते हैं कि आक्रामक इमिग्रेशन नीति को लेकर मतदाताओं में चिंता बढ़ रही है।
'अब लोग इसे सिर्फ इमिग्रेशन का मुद्दा नहीं मान रहे'
मॉडरेट रिपब्लिकन पॉलिटिकल स्ट्रैटेजिस्ट माइक मैड्रिड का कहना है कि लोगों की सोच बदल रही है। उनके मुताबिक, अब लोग इसे सिर्फ इमिग्रेशन का सवाल नहीं मान रहे, बल्कि इसे अधिकारों का उल्लंघन, ड्यू प्रोसेस की अनदेखी और संवैधानिक सीमाओं से बाहर जाकर इलाकों को सैन्य तरीके से कंट्रोल करने के तौर पर देख रहे हैं।
उनका कहना है कि यह राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी दोनों के लिए एक बड़ी राजनीतिक समस्या बन रही है।
इमिग्रेशन पर ट्रंप की लोकप्रियता घटी
मार्च में ट्रंप की इमिग्रेशन नीति को लेकर 50 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग थी। लेकिन दिसंबर के मध्य तक यह घटकर 41 प्रतिशत रह गई। यह वही मुद्दा था, जिसे लंबे समय तक ट्रंप की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत माना जाता रहा है।
मास्क पहने एजेंट्स और सख्त कार्रवाई पर गुस्सा
लोगों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यह भी रही है कि कई जगह मास्क पहने फेडरल एजेंट्स ने रिहायशी इलाकों में कार्रवाई की। आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ। कुछ मामलों में अमेरिकी नागरिकों को भी हिरासत में लिया गया। इन घटनाओं ने डर और असंतोष दोनों को बढ़ाया है।
‘अगले साल आंकड़े तेजी से बढ़ेंगे’
ट्रंप प्रशासन ने हैती, वेनेजुएला और अफगानिस्तान के सैकड़ों हजार इमिग्रेंट्स का अस्थायी कानूनी दर्जा खत्म कर दिया है। इससे डिपोर्ट किए जा सकने वाले लोगों की संख्या और बढ़ गई है। राष्ट्रपति हर साल 10 लाख इमिग्रेंट्स को बाहर करने की बात करते हैं। हालांकि, माना जा रहा है कि इस साल यह लक्ष्य पूरा नहीं होगा। जनवरी में पद संभालने के बाद से अब तक करीब 6.22 लाख इमिग्रेंट्स को डिपोर्ट किया जा चुका है।
व्हाइट हाउस के बॉर्डर मामलों के प्रमुख टॉम होमैन का कहना है कि नई फंडिंग के साथ ICE ज्यादा अधिकारियों की भर्ती करेगा और डिटेंशन क्षमता बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि अगले साल आप आंकड़ों में बहुत बड़ा उछाल देखेंगे।' उन्होंने साफ कहा कि इस प्लान में वर्कप्लेस पर और ज्यादा कार्रवाई शामिल है।
क्या अब बिजनेस भी बोलेंगे
थर्ड वे नाम के सेंटर-लेफ्ट थिंक टैंक की सोशल पॉलिसी डायरेक्टर सारा पियर्स का कहना है कि बीते एक साल में अमेरिकी कंपनियां खुलकर विरोध नहीं कर रही थीं। लेकिन अगर सरकार का फोकस सीधे नियोक्ताओं और कंपनियों पर गया, तो बिजनेस जगत की प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
उनके मुताबिक, यह देखना अहम होगा कि क्या कंपनियां आखिरकार इस नीति के खिलाफ आवाज उठाती हैं।
अपराधियों पर फोकस का दावा, लेकिन...
सरकार सार्वजनिक तौर पर कहती रही है कि कार्रवाई अपराधियों पर केंद्रित है। लेकिन सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि ट्रंप प्रशासन पहले के मुकाबले ऐसे लोगों को ज्यादा गिरफ्तार कर रहा है, जिन पर इमिग्रेशन उल्लंघन के अलावा कोई और आपराधिक मामला नहीं है।
नवंबर के अंत तक ICE द्वारा गिरफ्तार किए गए करीब 54 हजार लोगों में से 41 प्रतिशत के खिलाफ इमिग्रेशन उल्लंघन के अलावा कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। इसके उलट, ट्रंप के पद संभालने से पहले जनवरी की शुरुआती हफ्तों में यह आंकड़ा सिर्फ 6 प्रतिशत था।
कानूनी इमिग्रेंट्स पर भी सख्ती
ट्रंप प्रशासन ने कानूनी इमिग्रेंट्स के खिलाफ भी कड़े कदम उठाए हैं। ग्रीन कार्ड इंटरव्यू के दौरान अमेरिकी नागरिकों के जीवनसाथियों को गिरफ्तार किया गया। कुछ लोगों को नागरिकता समारोह से ठीक पहले बाहर निकाला गया। हजारों स्टूडेंट वीजा रद्द किए गए।
वर्कप्लेस रेड से अर्थव्यवस्था पर असर का खतरा
आने वाले साल में अगर जॉब साइट्स पर कार्रवाई तेज होती है, तो इसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। वर्कप्लेस रेड में पकड़े गए इमिग्रेंट्स की जगह नए कर्मचारियों की भर्ती से लेबर कॉस्ट बढ़ सकती है, जिससे महंगाई के खिलाफ ट्रंप की लड़ाई कमजोर पड़ सकती है।
विश्लेषकों के मुताबिक, महंगाई नवंबर में होने वाले चुनावों में कांग्रेस के नियंत्रण को तय करने वाला बड़ा मुद्दा बन सकती है।
नियोक्ताओं को सीधे निशाना बनाने की तैयारी
इस साल की शुरुआत में ट्रंप के आदेश पर कुछ सेक्टर्स को कार्रवाई से छूट दी गई थी, लेकिन बाद में उस फैसले को पलट दिया गया। इमिग्रेशन पर सख्त रुख रखने वाले कुछ समूह अब खुलकर कह रहे हैं कि नियोक्ताओं पर कार्रवाई जरूरी है।
सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज की पॉलिसी डायरेक्टर जेसिका वॉन के मुताबिक, जब सरकार नियोक्ताओं के पीछे जाएगी, तो वे खुद नियमों का पालन करने लगेंगे।
कुल मिलाकर, 2026 में अमेरिका की इमिग्रेशन नीति न सिर्फ ज्यादा सख्त होने जा रही है, बल्कि इसके राजनीतिक और आर्थिक असर भी पहले से ज्यादा गहरे दिख सकते हैं।