US-Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच बीते दिन दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान हुआ। हालांकि, इस युद्ध विराम के पीछे की कूटनीतिक तनातनी अब खुलकर सामने आ गई है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान ने शुरुआत में जो शर्तें रखी थीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही लेबनान को लेकर भी दोनों देशों के बीच भारी विरोधाभास पैदा हो गया है।
'ईरान का प्रस्ताव कचरे के डिब्बे में डालने लायक'
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक ब्रीफिंग में कहा कि ईरान द्वारा भेजा गया शुरुआती 10-सूत्रीय प्रस्ताव पूरी तरह से 'मजाकिया और अस्वीकार्य' था। लेविट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम ने इस प्रस्ताव को देखते ही खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'यह सोचना भी बेतुका है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान की 'विश लिस्ट' को समझौते के रूप में स्वीकार करेंगे।' फिलहाल पर्दे के पीछे बातचीत जारी है, और ट्रंप ने जिन समझौते की शर्तों को 'काम करने योग्य' बताया था, उसकी बारीकियां अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
लेबनान सीजफायर में शामिल है या नहीं?
इस समय सबसे बड़ा विवाद इस बात पर है कि क्या यह युद्धविराम लेबनान पर भी लागू होता है। इसे लेकर तीन अलग-अलग दावे सामने आए हैं:
ट्रंप का स्टैंड: राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है। उन्होंने पेंटागन की ब्रीफिंग के बाद कहा कि लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ इजरायल के हमले जारी रहेंगे, क्योंकि वह एक अलग मोर्चा है।
ईरान की शर्त: इसके विपरीत, ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उनके प्रस्ताव में लेबनान में हिजबुल्ला पर इजरायली हमलों को रोकने की गारंटी शामिल है।
इजरायल की कार्रवाई: इजरायल ने भी ट्रंप की बात का समर्थन करते हुए लेबनान में अपने हमले तेज कर दिए हैं, जिससे साफ है कि वह इसे सीजफायर का हिस्सा नहीं मानता।
ईरान की क्या है 'बड़ी' मांगें?
ईरान ने समझौते में जो मांगें रखी हैं, वे अमेरिका के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं हैं। ईरान चाहता है कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर उसे पूरा नियंत्रण मिले, जो युद्ध से पहले भी उसके पास नहीं था। इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका से सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाने की मांग की है। ईरान ने अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों को भी रिलीज करने की शर्त रखी है।
पाकिस्तानी पीएम की घोषणा से बढ़ा भ्रम
इस पूरे मामले में भ्रम की स्थिति पैदा करने में पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्वीट कर दावा किया था कि यह सीजफायर लेबनान सहित हर जगह लागू है। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शहबाज शरीफ के उसी ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए अमेरिका पर निशाना साधा। अराघची ने कहा, 'अमेरिका को शांति या इजरायल के जरिए युद्ध, दोनों में से किसी एक को चुनना होगा। गेंद अब अमेरिका के पाले में है।'