Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी न्यायपालिका के बीच टकराव अब एक नए स्तर पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके वैश्विक टैरिफ प्लान को रद्द किए जाने के बावजूद, ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इसे लेकर उन्होंने एक के बाद एक कई पोस्ट किए जिससे ये बात साफ हो गई है कि वो कोर्ट के आदेश को मानने वाले नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के पिछले महीने के फैसले को चुनौती देते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके पास टैक्स लगाने के अन्य तरीके मौजूद हैं। ट्रंप ने लिखा, 'मेरे पास दूसरे रूप में टैरिफ लगाने का पूर्ण अधिकार है, और मैंने ऐसा करना शुरू भी कर दिया है।' कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद, ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव आदेश के जरिए अमेरिका में होने वाले आयात पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था।
ट्रंप ने अमेरिका की सबसे बड़ी अदालत को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए 'पूरी तरह अक्षम और शर्मनाक' बताया। उन्होंने कहा कि हमारे संस्थापकों ने जिस उद्देश्य के लिए इस अदालत को बनाया था, यह वैसी बिल्कुल नहीं रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के फैसले देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सच बोलना उनकी जिम्मेदारी है, भले ही इसके लिए उन्हें भविष्य में समस्याओं का सामना करना पड़े।
फेडरल जज और जेरोम पॉवेल पर भी बोला हमला
टैरिफ के अलावा, ट्रंप ने फेडरल जज जेम्स बोसबर्ग पर भी निशाना साधा। दरअसल, फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल के खिलाफ मुख्यालय के नवीनीकरण में हुए खर्च को लेकर एक जांच चल रही थी। जज बोसबर्ग ने इस जांच से जुड़े समन को रद्द कर दिया, जिससे ट्रंप नाराज हैं। ट्रंप ने लिखा कि जज का फैसला कानून से नहीं बल्कि 'पूरी तरह राजनीति' से प्रेरित है।
फेडरल रिजर्व के साथ ट्रंप का है पुराना विवाद
ट्रंप लंबे समय से फेडरल रिजर्व और उसके अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। ट्रंप का मानना है कि जेरोम पॉवेल को ब्याज दरें कम रखनी चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था को सहारा मिले। ट्रंप फेडरल रिजर्व की गवर्नर लीसा कुक को भी हटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कुक पर 'मॉर्टगेज फ्रॉड' के आरोप लगाए हैं, हालांकि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में भी ट्रंप के रुख पर असहमति जता चुका है।