Trump-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब पूरी तरह से बेकाबू होता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार, 19 मई को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अपने शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और सैन्य अधिकारियों के साथ एक बेहद उच्च स्तरीय बैठक करने जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य हमले के विकल्पों की आखिरी समीक्षा की जाएगी।
यह मीटिंग तब होने जा रही है जब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने फारस की खाड़ी में स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेस को तबाह करने की खुली धमकी दी है, जिसके बाद मिडिल ईस्ट में फुल-स्केल युद्ध का खतरा मंडराने लगा है।
ट्रंप की खुली चेतावनी: 'फास्ट चलो, वरना कुछ नहीं बचेगा'
ईरान द्वारा अमेरिकी प्रस्तावों को खारिज करने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को चेतावनी देते हुए लिखा, 'ईरान के लिए घड़ी टिक-टिक कर रही है, और बेहतर होगा कि वे जल्दी से आगे बढ़ें, वरना उनका कुछ भी बाकी नहीं बचेगा। समय बहुत कम है!'
ट्रंप ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच पहले से लागू नाजुक युद्धविराम अब आखिरी सांसें ले रहा है और अमेरिका अब और रियायत देने के मूड में नहीं है।
खाड़ी देशों में अमेरिकी बेसों पर मंडराया संकट
ईरान ने इस बार अमेरिका को सीधे उसकी सरजमीं के बजाय खाड़ी देशों में मौजूद उसके सैन्य नेटवर्क को निशाना बनाने की धमकी दी है। कतर, बहरीन (अमेरिकी 5वां बेड़ा तैनात है), यूएई, सऊदी अरब और कुवैत में फैले अमेरिकी फॉरवर्ड मिलिट्री बेस को ईरान ने अपनी मिसाइलों के दायरे में ले लिया है।
हालिया खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान समर्थित समूहों ने सऊदी अरब की हवाई सीमा में तीन ड्रोन भेजे जिन्हें इंटरसेप्ट किया गया। वहीं अबू धाबी (UAE) के बरकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास भी एक ड्रोन स्ट्राइक के कारण आग लगने की घटना सामने आई है, जिसने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
होर्मुज पर ईरान का कड़ा पहरा
इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलमार्ग है। ईरान की आईआरजीसी (IRGC) ने इस रणनीतिक समुद्री रास्ते को पूरी तरह से ब्लॉक कर रखा है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गई है।
ईरान के आर्टेश प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमीनिया ने साफ कहा है कि ईरान अब अमेरिकी युद्धपोतों या हथियारों को इस जलमार्ग से गुजरने की इजाजत नहीं देगा।
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन पर सख्त पाबंदियां लगाए, लेकिन ईरान इसे अपने नागरिक अधिकारों का हनन बताकर अमेरिकी शर्तों का विरोध कर रहा है।
नेतन्याहू से ट्रंप की फोन पर बातचीत
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, सिचुएशन रूम की इस बड़ी बैठक से ठीक पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से फोन पर लंबी बातचीत की है। दोनों नेताओं ने ईरान के परमाणु ठिकानों और उसकी रीढ़ माने जाने वाले IRGC के कमांड सेंटरों पर दोबारा से संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू करने की रणनीति पर चर्चा की है।