दो विध्वंसक जहाजों के साथ अमेरिका ने होर्मुज में शुरू किया 'माइन क्लीयरेंस' ऑपरेशन, ट्रंप बोले- 'जल्द ही शुरू होगी आवाजाही'

Hormuz Mine Clearance Operation: ट्रंप ने कहा कि होर्मुज को फिर से ओपन करना उन देशों की अर्थव्यवस्था के लिए एक 'एहसान' है जो तेल के लिए इस रास्ते पर निर्भर हैं। उन्होंने चीन, जापान और फ्रांस जैसे देशों का नाम लेते हुए कहा कि 'इन देशों में खुद यह काम करने की हिम्मत नहीं है'

अपडेटेड Apr 12, 2026 पर 7:44 AM
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CENTCOM के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि एक नया और सुरक्षित समुद्री मार्ग तैयार किया जा रहा है

US Navy Destroyers: पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच शांति प्रस्ताव को लेकर बातचीत जारी है। इसी बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत झोंक दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, शनिवार को दो शक्तिशाली नौसैनिक विध्वंसक जहाजों ने इस जलसंधि में प्रवेश कर समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने का काम शुरू कर दिया है।

आपको बता दें कि दुनिया के कुल कच्चे तेल की सप्लाई का पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से यह रास्ता लगभग बंद था, जिससे भारत और एशिया के कई देशों में तेल और LPG संकट गहरा गया था।

USS फ्रैंक ई. पीटरसन और USS माइकल मर्फी मोर्चे पर


अमेरिकी नौसेना के दो गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, USS फ्रैंक ई. पीटरसन (DDG-121) और USS माइकल मर्फी (DDG-112) इस ऑपरेशन की अगुवाई कर रहे हैं। इनका काम मुख्य रूप से ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) द्वारा बिछाई गई समुद्री सुरंगों का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना। आने वाले दिनों में इस ऑपरेशन में अंडरवाटर ड्रोन भी शामिल किए जाएंगे, जो पानी के भीतर छिपी बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने में माहिर है।

CENTCOM के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि एक नया और सुरक्षित समुद्री मार्ग तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही पूरी दुनिया के साथ साझा किया जाएगा ताकि तेल और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके।

'चीन और फ्रांस के पास हिम्मत नहीं'

ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर इस ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए दुनिया के अन्य देशों पर निशाना साधा। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज को साफ करना उन देशों की अर्थव्यवस्था के लिए एक 'एहसान' है जो तेल के लिए इस रास्ते पर निर्भर हैं। उन्होंने चीन, जापान और फ्रांस जैसे देशों का नाम लेते हुए कहा कि 'इन देशों में खुद यह काम करने की हिम्मत नहीं है।' साथ ही उन्होंने दावा किया कि इस युद्ध में ईरान 'बुरी तरह हार रहा है' और अब उसके पास केवल समुद्री बारूदी सुरंगों का डर दिखाकर जहाजों को धमकाने का ही रास्ता बचा है।

सीजफायर के बीच बढ़ता तनाव

यह सैन्य ऑपरेशन ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ अधिकारी शांति वार्ता के लिए आमने-सामने बैठे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने इस माइन क्लीयरेंस ऑपरेशन के लिए ईरानी अधिकारियों से कोई बातचीत नहीं की है।

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