बंद ही रहेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज! UN में आया खुलवाने का प्रस्ताव, रूस और चीन ने किया वीटो

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने का UN प्रस्ताव रूस और चीन के वीटो से गिर गया। इससे वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा बढ़ गया है। ट्रंप की चेतावनी और बढ़ते तनाव के बीच हालात और गंभीर होने की आशंका है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने न्यूक्लियर हमले की आशंका को खारिज किया है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Apr 07, 2026 पर 11:05 PM
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प्रस्ताव बहरीन ने तैयार किया था और अमेरिका इसका समर्थन कर रहा था।

यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में मंगलवार को एक प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। इसका मकसद ईरान युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला बनाए रखना था। लेकिन रूस और चीन ने इस प्रस्ताव को वीटो कर दिया। यह प्रस्ताव पहले ही इतना नरम किया जा चुका था कि दोनों देश शायद वोटिंग से दूरी बना लें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

UN में 5 स्थायी सदस्य हैं- अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन। इनके पास वीटो पावर होती है। इनमें से कोई भी एक देश 'ना' कह दे, तो प्रस्ताव पास नहीं होता, चाहे बाकी देश उसके पक्ष में क्यों न हों।

किसने पेश किया प्रस्ताव


यह प्रस्ताव बहरीन ने तैयार किया था और अमेरिका इसका समर्थन कर रहा था। 15 सदस्यीय काउंसिल में 11 देशों ने इसके पक्ष में वोट दिया, जबकि रूस और चीन ने विरोध किया। पाकिस्तान और कोलंबिया ने वोटिंग से दूरी बनाई।

AFP के मुताबिक, बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल जायानी ने प्रस्ताव खारिज होने पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों को उम्मीद थी कि इस अहम समुद्री रास्ते की सुरक्षा के लिए दुनिया का मजबूत समर्थन मिलेगा। दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इसकी अहमियत बहुत ज्यादा है।

प्रस्ताव में क्या बदला

शुरुआती प्रस्ताव में देशों को 'हर जरूरी कदम' उठाने की अनुमति देने की बात थी। इसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल हो सकती थी, ताकि इस रास्ते को सुरक्षित रखा जा सके। लेकिन अंतिम ड्राफ्ट में इस हिस्से को हटा दिया गया। बाद में सिर्फ इतना कहा गया कि देश मिलकर रक्षात्मक कदम उठाएं ताकि जहाजों की आवाजाही बनी रहे।

यह वोटिंग ऐसे समय में हुई जब हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) तक इस समुद्री रास्ते को खोलने की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमला किया जा सकता है।

ट्रंप का सख्त बयान

ट्रंप ने इससे पहले कड़ा बयान देते हुए कहा था कि अगर ईरान ने उनकी शर्तें नहीं मानीं, तो 'पूरी एक सभ्यता खत्म हो सकती है।' उन्होंने अपने प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, 'एक पूरी सभ्यता आज रात खत्म हो सकती है, जो फिर कभी वापस नहीं आएगी। मैं ऐसा नहीं चाहता, लेकिन शायद ऐसा हो सकता है।'

ट्रंप ने हमले की पूरी जानकारी नहीं दी। लेकिन पहले यह संकेत दे चुके हैं कि अमेरिकी सेना ईरान के पुलों, पावर प्लांट्स और अन्य नागरिक ढांचे को निशाना बना सकती है और उसे 'स्टोन एज' में पहुंचा सकती है।

न्यूक्लियर हमले से इनकार

इस बीच व्हाइट हाउस ने साफ किया कि उपराष्ट्रपति JD वेंस के बयान में ईरान पर किसी भी तरह के न्यूक्लियर हमले का कोई संकेत नहीं था। वेंस ने कहा था कि अमेरिकी सेना के पास ऐसे कई विकल्प हैं, जिनका 'अब तक इस्तेमाल करने का फैसला नहीं लिया गया है', ताकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी को लागू किया जा सके।

इसके बाद व्हाइट हाउस ने X पर जवाब देते हुए कहा कि वेंस के बयान में कहीं भी ऐसा कुछ नहीं है, जिससे न्यूक्लियर हमले का इशारा मिलता हो। उन्होंने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया। दरअसल, यह प्रतिक्रिया उस पोस्ट के जवाब में आई थी, जो पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से जुड़े एक अकाउंट ने किया था। उस पोस्ट में कहा गया था कि वेंस के बयान से यह संकेत मिलता है कि ट्रंप न्यूक्लियर हथियारों के इस्तेमाल पर विचार कर सकते हैं।

बातचीत की गुंजाइश?

ट्रंप ने आखिरी समय में बातचीत की संभावना भी जताई है। उन्होंने लिखा कि अगर पूरी तरह सत्ता परिवर्तन होता है और ज्यादा समझदार नेतृत्व आता है, तो शायद कोई सकारात्मक नतीजा निकल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे क्या होता है।

सोमवार को एक अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव भी सामने आया था, लेकिन उसे पर्याप्त नहीं माना गया। वहीं ईरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि वह सिर्फ तभी मानेगा जब युद्ध पूरी तरह खत्म होगा।

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