US Attacks Venezuela: चीन के लोग अमेरिका के वेनेजुएला पर हमले से खुश, बोले- चीन भी ताइवान पर ऐसे करे कब्जा

US Attacks Venezuela: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के बाद चीन के सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई यूजर्स ने इसे ताइवान से निपटने का मॉडल बताया, हालांकि चीन सरकार ने आधिकारिक तौर पर अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की है।

अपडेटेड Jan 04, 2026 पर 11:14 PM
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हाल के महीनों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान के आसपास सैन्य दबाव बढ़ाया है।

US Attacks Venezuela: अमेरिकी ने वेनेजुएला पर हमला किया और वहां राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर तख्तापलट कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम चीन के सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस छेड़ दी है। कई चीनी यूजर्स का कहना है कि यह ऑपरेशन चीन के लिए ताइवान से निपटने का संभावित मॉडल है।

वीबो पर ट्रेंड, करोड़ों व्यूज

शनिवार देर रात यह मुद्दा चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर टॉप ट्रेंड करने लगा। एक्स जैसे इस प्लेटफॉर्म पर इस विषय को करीब 44 करोड़ बार देखा गया। कई यूजर्स ने वेनेजुएला की स्थिति की तुलना ताइवान से की। ताइवान को चीन अपना हिस्सा मानता है। वहीं, ताइवान खुद को आजाद लोकतंत्र बताता है।


ताइवान को लेकर तीखी टिप्पणियां

एक चीनी यूजर ने लिखा, 'भविष्य में ताइवान को वापस लेने के लिए भी यही तरीका अपनाया जाना चाहिए।' एक अन्य ने कहा, 'जब अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून को गंभीरता से नहीं लेता, तो हमें इसकी परवाह क्यों करनी चाहिए?'

एक और पोस्ट में लिखा गया कि मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने के लिए अमेरिका की 'बिजली जैसी कार्रवाई' चीन की सेना के लिए ताइवान पर अचानक हमले का ब्लूप्रिंट हो सकती है। इस पोस्ट में ताइवान के लिए अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल भी किया गया और वहां के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते का नाम लिया गया।

चीन सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया

चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। मंत्रालय ने कहा कि वेनेजुएला पर की गई यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का साफ उल्लंघन है।

इससे पहले भी चीन ने ट्रंप की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा था कि वह एक संप्रभु देश के खिलाफ बल प्रयोग से 'एकदम हैरान' है।

शी जिनपिंग की रणनीति और सैन्य दबाव

हाल के महीनों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान के आसपास सैन्य दबाव बढ़ाया है। इसमें द्वीप के चारों ओर लाइव-फायर सैन्य अभ्यास भी शामिल हैं। हालांकि ट्रंप ने इन अभ्यासों को कमतर बताया था।

हालांकि, इन सबके चीन ने अब तक सीधे सैन्य कार्रवाई से परहेज किया है। उसने दबाव की रणनीति के साथ कूटनीतिक मोर्चे को प्राथमिकता दी है।

क्या बदलेगी चीन की ताइवान नीति?

चीन में उभरी राष्ट्रवादी भावनाओं का यह उफान जरूरी नहीं कि ताइवान को लेकर शी जिनपिंग की नीति में तुरंत बदलाव लाए। हालांकि ट्रंप की कार्रवाई बीजिंग को अपने क्षेत्र में सैन्य आक्रामकता बढ़ाने की ज्यादा गुंजाइश दे सकती है।

चीन-ताइवान पर एक्सपर्ट्स की राय

अमेरिका के पूर्व राजनयिक और ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के सीनियर फेलो रयान हैस ने ब्लूमबर्ग को बताया कि वेनेजुएला की घटनाएं ताइवान को लेकर चीन की रणनीति में कोई बड़ा मोड़ नहीं लाएंगी। उनके मुताबिक, चीन ने अब तक ताइवान पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के चलते नहीं टाला है।

हैस ने यह भी कहा कि चीन निजी तौर पर अमेरिका से यह उम्मीद कर सकता है कि उसे भी वही 'महाशक्ति छूट' मिले, जो अमेरिका खुद को अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में देता है, खासकर दक्षिण चीन सागर में।

दशकों से अमेरिका की भूमिका

अमेरिका दशकों से ताइवान का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर रहा है। उसने चीन की सैन्य आक्रामकता पर एक तरह से रोक लगाई है। प्रतिबंधों और अमेरिकी सैन्य प्रतिक्रिया के खतरे ने किसी भी संभावित हमले को अब तक रोके रखा है। साथ ही चीन को घरेलू जनभावना, सैन्य तैयारी और आर्थिक असर भी तौलना पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर चीन का नैरेटिव

ट्रंप की कार्रवाई शी जिनपिंग को यह मौका देती है कि चीन खुद को अंतरराष्ट्रीय नियम-व्यवस्था का संरक्षक दिखा सके। चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ ने टिप्पणी में कहा कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून की सीमाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। उसने दुनिया को 'औपनिवेशिक दौर की बर्बर लूट' की ओर धकेल दिया है।

शिन्हुआ के मुताबिक, अमेरिका का यह कदम तथाकथित 'ड्रग आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई' के पीछे छिपे संसाधन साम्राज्यवाद को उजागर करता है।

हमले से पहले चीन की कूटनीतिक मौजूदगी

मादुरो की गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले चीन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल वेनेजुएला की राजधानी कराकास में उनसे मिला था। इसकी तस्वीरें मादुरो ने खुद सोशल मीडिया पर साझा की थीं। हालांकि यह साफ नहीं है कि हमले के वक्त ये चीनी अधिकारी वेनेजुएला में मौजूद थे या नहीं।

वेनेजुएला में चीन की बड़ी दिलचस्पी

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन वेनेजुएला में सत्ता संभालने वालों के साथ रिश्ते बनाए रखने की मजबूत स्थिति में है। चीन ने विचारधारा से परे सभी प्रभावी राजनीतिक ताकतों के साथ जुड़ाव रखा है। वह अपने बड़े निवेश और वेनेजुएला के रणनीतिक महत्व को देखते हुए लंबे समय तक वहां मौजूद रहने की कोशिश करेगा।

तेल, प्रतिबंध और अमेरिका का दबाव

वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं, लेकिन देश अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे में है। चीन वेनेजुएला का सबसे बड़ा तेल खरीदार है। तेल निर्यात ही वेनेजुएला की करीब 95 प्रतिशत राजस्व का जरिया है।

हाल के दिनों में ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के तेल व्यापार पर दबाव बढ़ाया है। उसने हांगकांग और चीन की कंपनियों और उनसे जुड़े तेल टैंकरों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन पर प्रतिबंधों से बचने का आरोप है।

महीनों की तैयारी के बाद हुआ ऑपरेशन

मादुरो को सत्ता से हटाने का यह ऑपरेशन महीनों से चल रहे उस अभियान के बाद हुआ, जिसमें कथित तौर पर अवैध ड्रग्स ले जा रही नौकाओं पर हवाई हमले किए गए थे।

एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो लाइल मॉरिस के मुताबिक, शी जिनपिंग ट्रंप की कार्रवाई को महाशक्तियों द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर पड़ोसी देशों में दखल के तौर पर देख सकते हैं। जैसा कि चीन रूस के यूक्रेन युद्ध को देखता है। उनके अनुसार ताइवान पर संभावित चीनी कार्रवाई भी इसी सोच के तहत देखी जा सकती है।

क्या चीन कर पाएगा ऐसा ऑपरेशन?

कुछ एक्सपर्ट इस बात पर संदेह जताते हैं कि चीन के पास ऐसे जटिल ऑपरेशन का तजुर्बा है या नहीं। अमेरिकी सेना के मुताबिक यह कार्रवाई महीनों की खुफिया तैयारी और 150 से ज्यादा विमानों की मदद से की गई थी।

सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पास फिलहाल ऐसा अनुभव नहीं है। हालांकि उनका यह भी मानना है कि चीन के पास ताइवान के नेतृत्व को कमजोर या खत्म करने के अन्य तरीके हो सकते हैं।

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