US Attacks Venezuela: ट्रंप ने मादुरो की पत्नी सिलिया फ्लोरेस को क्यों पकड़ा? जानिए इसके पीछे छिपा मकसद

US Attacks Venezuela: अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को भी हिरासत में लिया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह कदम सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक अहम रणनीति का हिस्सा है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Jan 04, 2026 पर 10:24 PM
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फिलहाल मादुरो दंपति को न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है।

US Attacks Venezuela: अमेरिका ने एक सैन्य अभियान में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ पकड़ लिया। इस अभियान को आधुनिक इतिहास में 'अभूतपूर्व' बताया जा रहा है। फ्लोरेस को मादुरो सरकार की सबसे अहम राजनीतिक शख्सियतों में गिना जाता है।

मादुरो पर न्यूयॉर्क में मुकदमा चलेगा। वहीं, उनकी पत्नी की गिरफ्तारी दिखाती है कि अमेरिका कराकास में किसी भी तरह की राजनीतिक वापसी की संभावना को पहले ही खत्म करना चाहता था।

सिलिया फ्लोरेस: मादुरो के पीछे का दिमाग


विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव ने ANI से बातचीत में कहा कि फ्लोरेस की गिरफ्तारी पूरी तरह सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी। उनके मुताबिक, 'मादुरो पर न्यूयॉर्क में आरोप तय होंगे। उनकी पत्नी को भी इसलिए पकड़ा गया क्योंकि वह वेनेजुएला की संसद की सदस्य हैं। वह बेहद तेज और समझदार महिला मानी जाती हैं। कहा जाता है कि मादुरो के फैसलों के पीछे असली दिमाग वही थीं।'

अमेरिका उन्हें वेनेजुएला में छोड़ना नहीं चाहता था, क्योंकि मादुरो की गैरमौजूदगी में वह राजनीतिक रूप से समर्थन जुटा सकती थीं। साथ ही, सत्ता की वापसी की कोशिश कर सकती थीं। इसलिए उन पर भी ड्रग तस्करी से जुड़े आरोप लगाए गए और दोनों को एक साथ हिरासत में लिया गया।

मादुरो की वापसी के रास्ते बंद करने की कोशिश

एक्सपर्ट्स का कहना है कि फ्लोरेस को हटाने का मकसद साफ था। अमेरिका नहीं चाहता था कि मादुरो के बाहर होने के बाद उनकी पत्नी किसी वैकल्पिक नेता के तौर पर उभरें और जनता या सेना को अपने पक्ष में खड़ा करें।

यही वजह है कि इस ऑपरेशन में सिर्फ राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि उनके सबसे मजबूत राजनीतिक सहारे को भी साथ में निशाना बनाया गया।

अमेरिकी कांग्रेस से कैसे बचा व्हाइट हाउस

ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के पूरे सैन्य अभिायन को ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व नाम दिया। इसे सैन्य हमला नहीं बल्कि लॉ एन्फोर्समेंट की कार्रवाई बताया।

रोबिंदर सचदेव के मुताबिक, ट्रंप इसे वेनेजुएला पर हमला नहीं बता रहे हैं, बल्कि एक अपराधी को पकड़ने की कार्रवाई के तौर पर पेश कर रहे हैं। इसी वजह से सेना के साथ कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल थे।

अगर इसे सैन्य हमला माना जाता, तो अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होती। लेकिन इसे ड्रग तस्करी से जुड़े अपराधियों की गिरफ्तारी बताकर ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस से अनुमति लेने की जरूरत ही खत्म कर दी।

ड्रग तस्करी और नार्को-आतंकवाद के आरोप

मादुरो पर नार्को-आतंकवाद की साजिश रचने और अमेरिका में कोकीन तस्करी कराने के गंभीर आरोप हैं। उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस पर भी इसी तरह के ड्रग तस्करी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी एजेंसियों का दावा है कि दोनों ने मिलकर एक संगठित आपराधिक नेटवर्क की तरह काम किया।

‘शानदार और बेदाग’ ऑपरेशन बताया गया

रोबिंदर सचदेव ने इस ऑपरेशन को सैन्य नजरिए से बेहद सफल बताया। उनके मुताबिक, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति को पकड़ना इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। जिस तरह का सैन्य अभियान अंजाम दिया गया, वह पूरी तरह अभूतपूर्व है। सैन्य स्तर पर यह एक शानदार और बिना किसी चूक के किया गया ऑपरेशन था।

इस वह कहां हैं मादुरो दंपति

फिलहाल मादुरो दंपति को न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि मादुरो की सरकार एक तरह से आपराधिक संगठन की तरह काम कर रही थी, जिसने पूरे पश्चिमी गोलार्ध को अस्थिर किया।

अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह वेनेजुएला को कुछ समय के लिए सीधे तौर पर 'चलाने' की योजना बना रहा है। इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रवासन संकट और देश के विशाल तेल भंडारों की सुरक्षा जैसे तर्क दिए गए हैं।

एक्सपर्ट का मानना है कि फ्लोरेस की गिरफ्तारी इस बात का सबसे बड़ा संकेत है कि अमेरिका चाविस्मो (Chavismo) की पूरी राजनीतिक मशीनरी को जड़ से खत्म करना चाहता है। चाविस्मो वेनेजुएला की वह राजनीतिक विचारधारा और सत्ता व्यवस्था है, जो पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज के नाम और उनकी नीतियों से जुड़ी है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और बढ़ता विवाद

इस ऑपरेशन के बाद वैश्विक स्तर पर विवाद तेज हो गया है। रूस और चीन ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।

CBS News के मुताबिक, 2005 से अब तक अमेरिका की अलग-अलग सरकारें ड्रग तस्करी, आतंकवाद और मानवाधिकार उल्लंघनों का हवाला देते हुए वेनेजुएला और उसके तेल क्षेत्र पर लगातार प्रतिबंध लगाती रही हैं।

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