US-Iran Talks: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को खत्म करने को लेकर कूटनीतिक गलियारों से बड़ी खबर आ रही है। 21 अप्रैल को खत्म हो रहे युद्धविराम की समय सीमा से पहले, अमेरिका और ईरान एक संभावित समझौते यानी 'फ्रेमवर्क डील' के काफी करीब पहुंच गए हैं। 'एक्सियोस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच जारी बातचीत में सकारात्मक प्रगति हुई है।
पाकिस्तान की है अहम भूमिका, तेहरान पहुंचे आसिम मुनीर
इस शांति वार्ता में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की मध्यस्थ के रूप में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। बुधवार को पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय दल तेहरान पहुंचा। वहीं व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान इस समय 'एकमात्र प्रभावी मध्यस्थ' के रूप में उभरा है और अगले दौर की आमने-सामने की बातचीत भी पाकिस्तान में ही हो सकती है।
ट्रंप की 'बैकचैनल' कूटनीति
रिपोर्ट के अनुसार, पर्दे के पीछे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोर टीम समझौते के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जैरेड कुशनर सीधे तौर पर ईरानी प्रतिनिधियों और बिचौलियों के संपर्क में हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे डील के करीब तो हैं, लेकिन ईरान के भीतर अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाना अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
युद्धविराम विस्तार की संभावना
अगर अगले कुछ दिनों में किसी शुरुआती ढांचे पर सहमति बन जाती है, तो 21 अप्रैल के बाद भी सीजफायर को बढ़ाया जा सकता है। क्योंकि एक व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों को और समय चाहिए होगा। इस बीच व्हाइट हाउस ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ने ईरान के सामने 'युद्धविराम की विनती' की है। लेविट ने स्पष्ट किया कि बातचीत बराबरी के आधार पर हो रही है।
नाकेबंदी से ईरान पर भारी आर्थिक दबाव
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान पर 'आर्थिक दबाव' काम कर रहा है। वाशिंगटन द्वारा ईरानी तेल निर्यात पर लगाई गई समुद्री नाकेबंदी ने तेहरान की अर्थव्यवस्था को भारी चोट पहुंचाई है। यही आर्थिक दबाव तेहरान को मेज पर बैठकर समझौता करने के लिए मजबूर कर रहा है।