US Iran War: ईरान पर हमले में 24 घंटे में अमेरिका ने खर्च किए ₹71000000000 से ज्यादा!

US Israel Iran War Cost: जमीन पर बड़ी जंग भले न हो, लेकिन समुद्र और आसमान में अमेरिकी मौजूदगी बेहद महंगी है। सेंटर फॉर न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के मुताबिक, USS जेराल्ड आर. फोर्ड जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को चलाने का खर्च करीब 6.5 मिलियन डॉलर प्रतिदिन है

अपडेटेड Mar 03, 2026 पर 4:38 PM
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US Israel Iran War Cost: इसमें F-15E Strike Eagle जैसे लड़ाकू विमानों की उड़ानें शामिल हैं

अमेरिका और इजरायल के ईरान पर बढ़ते हमलों के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है- यह युद्ध अमेरिका को कितना महंगा पड़ेगा? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ऑपरेशन “चार से पांच हफ्ते” चल सकता है, लेकिन जरूरत पड़ी तो इससे ज्यादा समय भी जारी रह सकता है। ऐसे में अंतिम खर्च का अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि लागत तेजी से बढ़ रही है।

पहले 24 घंटे में कितना खर्च?

तुर्की की न्यूज एजेंसी Anadolu Agency के हवाले से अनुमान है कि “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के पहले 24 घंटों में ही अमेरिका ने करीब 779 मिलियन डॉलर यानी ₹71,75,46,63,750 (71 अरब 75 करोड़ 46 लाख 63 हजार 750 रुपए) खर्च कर दिए।


सिर्फ फाइटर जेट, मेंटेनेंस और हथियारों के इस्तेमाल पर ही करीब 271 मिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इसमें F-15E Strike Eagle जैसे लड़ाकू विमानों की उड़ानें शामिल हैं।

हर दिन करोड़ों डॉलर का बोझ

जमीन पर बड़ी जंग भले न हो, लेकिन समुद्र और आसमान में अमेरिकी मौजूदगी बेहद महंगी है।

सेंटर फॉर न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के मुताबिक, USS जेराल्ड आर. फोर्ड जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को चलाने का खर्च करीब 6.5 मिलियन डॉलर प्रतिदिन है।

अगर कई स्ट्राइक ग्रुप हफ्तों तक क्षेत्र में तैनात रहते हैं, तो यह खर्च सैकड़ों मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

इसके अलावा मिसाइल डिफेंस सिस्टम, ड्रोन, खुफिया ऑपरेशन और विशेष विमान भी खर्च को लगातार बढ़ा रहे हैं।

पिछली जंगों से क्या सबक?

अमेरिका का अफगानिस्तान युद्ध लगभग 20 साल चला। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा विभाग को ही 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा दिए गए थे।

लेकिन जब पेंटागन के अतिरिक्त बजट, पुनर्निर्माण खर्च, कर्ज पर ब्याज और सैनिकों के इलाज को जोड़ा गया, तो कुल लागत 2.3 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा पहुंच गई।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ लिंडा बिल्मेस का अनुमान है कि इराक और अफगानिस्तान युद्ध के वेटरन्स के इलाज और पेंशन पर 2050 तक 2 ट्रिलियन डॉलर और खर्च हो सकते हैं।

इजरायल और क्षेत्र में हालिया खर्च

Brown University के “कॉस्ट ऑफ वॉर” प्रोजेक्ट के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 के बाद से अमेरिका ने इजरायल को 21.7 बिलियन डॉलर की सैन्य मदद दी है।

इसके अलावा यमन और अन्य क्षेत्रीय अभियानों पर 9.65 से 12.07 बिलियन डॉलर अतिरिक्त खर्च हुए।

कुल मिलाकर, अक्टूबर 2023 के बाद के संघर्षों पर अमेरिका अब तक 31 से 33 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुका है और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।

तेल बाजार और छिपी हुई लागत

सीधे सैन्य खर्च के अलावा आर्थिक असर भी बड़ा है।

खाड़ी क्षेत्र में तेल ठिकानों पर खतरा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछल सकती हैं। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट आती है, तो वैश्विक सप्लाई प्रभावित होगी।

इससे अमेरिका में महंगाई बढ़ सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। ये “अप्रत्यक्ष खर्च” पेंटागन के बजट में नहीं दिखते, लेकिन असर गहरा होता है।

जंग कितनी लंबी चलेगी?

ट्रंप ने इसे “निर्णायक लेकिन समय-सीमा के बिना” अभियान बताया है। वहीं रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यह “इंडलेस वॉर” यानी अंतहीन जंग नहीं बनेगी।

लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि मिसाइल और ड्रोन हमले अभी भी जारी हैं। ईरान में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजरायल और लेबनान में भी जानमाल का नुकसान हुआ है।

अभी यह साफ नहीं है कि यह संघर्ष चार-पांच हफ्तों में खत्म होगा या लंबा चलेगा।

लेकिन इतना तय है- हर दिन अरबों डॉलर का बोझ बढ़ रहा है। अगर यह जंग खिंचती है, तो अमेरिका को सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक- तीनों मोर्चों पर भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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