क्या अब खाड़ी देश भी कूदेंगे युद्ध में? ईरान Vs अमेरिका-इजरायल की जंग में फंसे सऊदी अरब और UAE जैसे देश के सामने क्या रास्ता

US-Israel Iran War: हवाई अड्डे, तेल रिफाइनरी, रिहायशी इलाके, बंदरगाह और अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़े परिसर हमलों की चपेट में आए हैं। ऐसे में खाड़ी सहयोग परिषद यानी Gulf Cooperation Council (GCC) के देशों के सामने बड़ा सवाल है- क्या वे सैन्य रूप से तटस्थ रहें और हमले सहते रहें, या जवाबी कार्रवाई कर सीधे युद्ध में उतरें

अपडेटेड Mar 03, 2026 पर 1:57 PM
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क्या अब खाड़ी देश भी कूदेंगे युद्ध में? ईरान Vs अमेरिका-इजरायल की जंग में फंसे सऊदी अरब और UAE जैसे देश के सामने क्या रास्ता

खाड़ी देशों में मिसाइल हमलों ने उस संतुलन को तोड़ दिया है, जिस पर यह इलाका सालों से टिके रहने की कोशिश कर रहा था- एक तरफ अमेरिका के साथ मजबूत सुरक्षा संबंध और दूसरी तरफ ईरान के साथ धीरे-धीरे सुधरते रिश्ते। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के जवाब में ईरान की बड़ी जवाबी कार्रवाई के बाद अब खाड़ी की राजधानियां सीधे निशाने पर आ गई हैं।

हवाई अड्डे, तेल रिफाइनरी, रिहायशी इलाके, बंदरगाह और अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़े परिसर हमलों की चपेट में आए हैं। ऐसे में खाड़ी सहयोग परिषद यानी Gulf Cooperation Council (GCC) के देशों के सामने बड़ा सवाल है- क्या वे सैन्य रूप से तटस्थ रहें और हमले सहते रहें, या जवाबी कार्रवाई कर सीधे युद्ध में उतरें?

ईरान ने किन-किन जगहों को बनाया निशाना?


तनाव तब बढ़ा जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान में बड़े पैमाने पर सैन्य ठिकानों और सरकारी ठिकानों पर हमला किया। इस कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौत की खबर आई।

इसके जवाब में तेहरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया।

कुछ प्रमुख घटनाएं इस प्रकार रहीं:

  • बहरीन में अमेरिकी नौसेना मुख्यालय पर मिसाइल दागी गई।
  • कतर ने कहा कि उसने अल उदैद एयर बेस की ओर आ रही मिसाइलों को रोका।
  • कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस को निशाना बनाया गया।
  • सऊदी अरब ने बताया कि रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास और पूर्वी क्षेत्र को निशाना बनाया गया।
  • संयुक्त अरब अमीरात ने कई मिसाइल और ड्रोन हमलों की पुष्टि की।

दुबई एयरपोर्ट, मनामा की ऊंची इमारतों, कुवैत एयरपोर्ट और दोहा के रिहायशी इलाकों में धमाकों या मलबा गिरने की खबरें सामने आईं। कई जगहों पर धुआं उठता देखा गया।

हादसों में जान-माल का नुकसान भी हुआ। UAE में तीन लोगों की मौत और कई घायल होने की पुष्टि हुई। कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन में भी कई लोग घायल हुए।

ऊर्जा ढांचे पर भी असर पड़ा। सऊदी अरब की रस तनूरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमले की खबर आई, हालांकि ईरान ने ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने से इनकार किया। कतर के रास लाफान औद्योगिक क्षेत्र में भी ड्रोन हमले हुए, जिसके बाद LNG प्रोडक्शन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।

UAE ने दावा किया कि उसकी ओर आ रहीं 174 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 161 को मार गिराया गया। सैकड़ों ड्रोन भी रोके गए। विशेषज्ञों का कहना है कि इन हमलों को रोकने की लागत अरबों डॉलर तक पहुंच सकती है।

ईरान का क्या तर्क है?

ईरान के विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा कि उनका देश “आत्मरक्षा का अधिकार” इस्तेमाल कर रहा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी ठिकानों को वैध लक्ष्य बताया।

ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारिजानी ने कहा कि उनका निशाना खाड़ी देश नहीं, बल्कि उनके यहां मौजूद अमेरिकी ठिकाने हैं। लेकिन जब रिहायशी इलाकों और होटल जैसी जगहों को नुकसान पहुंचा, तो खाड़ी देशों ने इसे अंधाधुंध हमला बताया।

बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई समेत कई देशों ने संयुक्त बयान में कहा कि “नागरिकों और गैर-युद्धरत देशों को निशाना बनाना गैर-जिम्मेदाराना और अस्थिर करने वाला कदम है।”

खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया

संकट बढ़ने के बीच गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने विदेश मंत्रियों की इमरजेंसी बैठक बुलाई। हालांकि, अभी तक किसी देश ने सीधे युद्ध में उतरने की घोषणा नहीं की है, लेकिन “जवाबी विकल्प खुले” रखने की बात कही गई है।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने हमलों की कड़ी निंदा की और जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखा। कतर ने इसे “अस्वीकार्य बढ़ोतरी” बताया। यूएई ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन कहा।

फिर भी, कुछ वरिष्ठ नेताओं ने संयम बरतने की अपील की। कतर के पूर्व प्रधानमंत्री शेख हमद बिन जासिम ने कहा कि खाड़ी देशों को सीधे टकराव में नहीं फंसना चाहिए, क्योंकि इससे दोनों पक्षों के संसाधन खत्म होंगे और बाहरी ताकतों को दखल का मौका मिलेगा।

दुविधा में फंसे खाड़ी देश

सऊदी अरब और UAE जैसे देशों ने पिछले कुछ सालों में एक दोहरी नीति अपनाई थी- अमेरिका के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी और ईरान के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश। उन्होंने यह भी साफ किया था कि उनकी जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होगा।

लेकिन अब जब ईरानी मिसाइलें सीधे उनके इलाकों में गिर रही हैं, तो यह संतुलन टूटता दिख रहा है।

अगर वे अमेरिका और इजरायल के साथ खुलकर युद्ध में उतरते हैं, तो यह क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव होगा। वहीं, अगर वे चुप रहते हैं, तो घरेलू दबाव और सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं।

खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था तेल, गैस, वित्तीय सेवाओं और विदेशी निवेश पर टिकी है। एयरपोर्ट, रिफाइनरी और गैस प्लांट पर हमले इन देशों की आर्थिक सुरक्षा पर सीधा असर डालते हैं।

फिलहाल, कड़ी बयानबाजी के बावजूद किसी खाड़ी देश ने ईरान के खिलाफ सैन्य जवाबी कार्रवाई शुरू नहीं की है। लेकिन हालात तेजी से बदल रहे हैं और पूरा पश्चिम एशिया एक बड़े मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है।

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