US Iran War: 'उन्होंने दो बार डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करने की कोशिश की', नेतन्याहू ने ईरान पर हमला पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए बताया जरूरी

बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल और अमेरिका को अभी कार्रवाई इसलिए करनी पड़ी, क्योंकि ईरान अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को तेजी से आगे बढ़ा रहा था। नेतन्याहू के मुताबिक, ईरान नए अंडरग्राउंड ठिकाने और बंकर बना रहा था, जिससे उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम कुछ ही महीनों में सुरक्षित हो जाता और फिर भविष्य में कोई कार्रवाई संभव नहीं रहती

अपडेटेड Mar 03, 2026 पर 12:49 PM
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US Iran War: बेनजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर हमला पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए बताया जरूरी

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम सिर्फ इजरायल या अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी था। बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी चैनल Fox News से बातचीत में इस अभियान को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” या “रोअरिंग लायन” बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई ईरान के खिलाफ एक रक्षात्मक कदम है। उनके मुताबिक, ईरान पिछले 47 सालों से “अमेरिका की मौत” के नारे लगा रहा है और दुनिया भर में आतंक फैलाने का काम कर रहा है।

नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान ने अमेरिकी दूतावासों पर हमले किए, हजारों अमेरिकियों को नुकसान पहुंचाया, अपने ही लोगों पर अत्याचार किए और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की कोशिश भी की। उन्होंने कहा, “यह शासन अमेरिका को खत्म करने के इरादे से काम कर रहा है।”

उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका को अभी कार्रवाई इसलिए करनी पड़ी, क्योंकि ईरान अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को तेजी से आगे बढ़ा रहा था। नेतन्याहू के मुताबिक, ईरान नए अंडरग्राउंड ठिकाने और बंकर बना रहा था, जिससे उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम कुछ ही महीनों में सुरक्षित हो जाता और फिर भविष्य में कोई कार्रवाई संभव नहीं रहती।


नेतन्याहू ने कहा, “अगर अभी कदम नहीं उठाया जाता तो बाद में बहुत देर हो जाती। ईरान अमेरिका को ब्लैकमेल कर सकता था और पूरी दुनिया को धमकी दे सकता था।”

उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की जमकर तारीफ की और कहा कि उनके जैसा “दृढ़ और स्पष्ट” नेता पहले कभी नहीं हुआ। नेतन्याहू ने बताया कि ट्रंप से उनकी मुलाकात फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में हुई थी, जहां ट्रंप ने साफ कहा था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।

नेतन्याहू ने यह भी कहा कि यह कोई लंबा चलने वाला युद्ध नहीं है। उनके शब्दों में, “यह अंतहीन जंग नहीं, बल्कि शांति की ओर एक रास्ता है।”

अमेरिकी अधिकारियों का समर्थन

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमलों की मंजूरी दी, ताकि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।

वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसे “एक पीढ़ी बदलने वाला मोड़” बताया और कहा कि सरकार की नीति “ताकत के जरिए शांति” लाने की है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक से पहले अमेरिका में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप से मुलाकात की और कहा कि अमेरिका-इजरायल गठबंधन मजबूत है।

इस बीच, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर घरेलू राजनीतिक विरोधियों की आलोचना भी की।

कैसे बढ़ा तनाव?

शनिवार को अमेरिका और इजरायल ने ईरान में कई सैन्य ठिकानों, परमाणु से जुड़े केंद्रों और नेतृत्व परिसरों पर हवाई और मिसाइल हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमले किए।

इन हमलों का असर इजरायल के अलावा बहरीन, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन जैसे देशों तक देखा गया, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है।

हालांकि दुनिया भर के नेता और अंतरराष्ट्रीय संगठन शांति और संयम की अपील कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात शांत होते नहीं दिख रहे हैं।

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