US-Iran impcat on Dubai Real Estate Deals: ईरान की अमेरिका और इजरायल के साथ भिड़ंत ने दुबई के रियल एस्टेट मार्केट को हिला दिया है। ईरान ने यूएई समेत GCC (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिंल) के कुछ देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ऐसे में दुबई के रियल एस्टेट बाजार के प्रमुख ब्रोकर और डेवलपर्स का मानना है कि अगले कुछ हफ्तों और महीनों में बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। बता दें कि ईरान के हमले का असर दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग बुर्ज खलीफा (Burj Khalifa) पर भी दिखा जिसे सावधानी के लिहाज से खाली करा लिया गया। दुबई प्रशासन का कहना है कि Palm Jumeirah प्रोजेक्ट में एक बिल्डिंग को नुकसान पहुंचा जिसमें चार लोग घायल हुए।
सोशल मीडिया फुटेज में दिख रहा है कि ईरान ने कुछ देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को जो निशाना बनाया था, उसमें से अधिकतर मिसाइलों को स्थानीय सिक्योरिटी फोर्सेज ने रोक लिया लेकिन अबूधाबी जैसे कुछ जगहों पर इन हमलों का असर दिखा। यूएई की सरकारी मीडिया के अनुसार इन हमलों में एक व्यक्ति की मौत हुई।
तेजी से उभर रहा दुबई का रियल एस्टेट मार्केट
दुबई के रियल एस्टेट मार्केट में पिछले साल 2025 में करीब $18.7 हजार करोड़ की रिकॉर्ड सेल्स हुई, जिसमें 2.15 लाख से अधिक लेन-देन हुए। इसमें अधिकतर सौदे लग्जरी प्रॉपर्टी की बिक्री और भारतीयों समेत अन्य देशों के नागरिकों की बढ़ती खरीदारी से जुड़ी थी। ब्रोकर्स के मुताबिक दुनिया के कई स्थानों पर छिड़ी लड़ाई के बीच दुबई निवेश सुरक्षित रखने की जगह के रूप में उभरा। वर्ष 2022 में रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया तो रूस और यूक्रेन के निवेशकों ने दुबई में ताबड़तोड़ निवेश किया। इसी प्रकार पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हालिया तनातनी में इन दोनों देशों के निवेशकों ने तेजी से दुबई का रास्ता पकड़ा।
भारत, यूके, रूस समेत अन्य देशों के लोगों ने दुबई में बड़ी प्रॉपर्टीज खरीदी हैं और दुबई के रियल एस्टेट मार्केट को नई ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया। अब ईरान के हमले ने हलचल बढ़ा दी है कि क्या आगे भी यह क्रेज बना रहेगा। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी-कभार हवाई हमलों की आवाजों के बावजूद स्थिति काफी हद तक शांत रही। दुबई के एक रियल एस्टेट ब्रोकर का कहना है कि स्थिति काफी हद तक सामान्य बनी हुई है, लेकिन नजर फिलहाल इस पर बना हुआ है कि लड़ाई का दायरा किस हद तक बढ़ता है। हालांकि उनका कहना है कि बाजार को अगले कुछ महीनों में इस लड़ाई का कुछ असर दिखने की आशंका क्योंकि जो लोग अभी तक कोई फैसला नहीं ले पाए हैं, वे रियल एस्टेट सौदों पर विचार करने से पहले स्थिति के शांत होने का इंतजार करना पसंद कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि दुबई के दो हवाई अड्डों-दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और अल मकतूम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के अस्थायी रूप से बंद होने से भी मार्केट सेंटिमेंट पर असर पड़ सकता है।
अन्य ब्रोकर्स का कहना है कि अगले कुछ हफ्तों में रियल एस्टेट सेक्टर की रफ्तार धीमी हो सकती है, लेकिन कीमतों में किसी बड़े बदलाव के आसार नहीं है। वाइजबिज रियल्टी के फाउंटर चिंतन वसानी का कहना है कि दुबई में रियल एस्टेट लेन-देन की निगरानी की जाती है और इसे लेकर नियमित तौर पर डेटा जारी होता है। उनका मानना है कि मार्केट में कुछ ओवरसप्लाई है लेकिन शहर में घरों की कीमतों में किसी बड़े बदलाव के आसार नहीं है, और आगे भी कीमतें स्थिर रह सकती हैं लेकिन युद्ध के मौजूदा माहौल के लंबे समय तक चलने पर कुछ दिक्कतें हो सकती हैं।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।