मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान ने खाड़ी देशों को कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान ने कहा है कि अगर इन देशों को ईरानी मिसाइलों के खतरे से बचना है, तो उन्हें अपने यहां मौजूद सभी अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों को हटाना होगा। ईरानी संसद के एक सांसद के हवाले से ईरानी अखबार Tehran Times ने कहा कि अगर UAE, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर, बहरीन और तुर्की जैसे देश ईरानी मिसाइलों के खतरे से बचना चाहते हैं, तो उन्हें अपने क्षेत्रों से अमेरिकियों को बाहर करना होगा और सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद करना होगा।
युद्ध का छठा दिन, लगातार हमले
अमेरिका और इजरायल की तरफ से 28 फरवरी को शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद यह संघर्ष अब छठे दिन में पहुंच चुका है। इसके जवाब में ईरान लगातार मिसाइल हमले कर रहा है।
तेहरान ने तेल अवीव समेत कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में मौजूद कुछ अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए हैं।
ईरान के फाउंडेशन ऑफ मार्टियर्स एंड वेटरन अफेयर्स के मुताबिक इस युद्ध में अब तक कम से कम 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है।
वहीं इजरायल ने भी गुरुवार को कई नए हमलों की चेतावनी दी और कहा कि उसने हिजबुल्ला से जुड़े ठिकानों पर लेबनान में भी कार्रवाई की है।
श्रीलंका के पास जहाज पर हमले का आरोप
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने आरोप लगाया कि बुधवार को अमेरिका ने श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर हमला किया।
उनका दावा है कि इस हमले में 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। उन्होंने इस घटना को “समुद्र में हुआ अत्याचार” बताया। बताया जा रहा है कि यह जहाज भारतीय नौसेना के निमंत्रण पर आया हुआ था और उसमें करीब 130 चालक दल के सदस्य मौजूद थे।
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण की चेतावनी
इसी बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने खाड़ी के उत्तरी हिस्से में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाया है, जिसमें आग लग गई।
IRGC ने यह भी कहा कि युद्ध की स्थिति में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों का रास्ता ईरान के नियंत्रण में रहेगा।
अमेरिका में भी राजनीतिक विवाद
इस बीच वॉशिंगटन में भी इस युद्ध को लेकर राजनीति तेज हो गई है। अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन सांसदों ने उस प्रस्ताव को रोक दिया, जिसमें ईरान के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमलों को रोकने और सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य करने की मांग की गई थी।
खामेनेई के अंतिम संस्कार में देरी
युद्ध के चलते ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को भी फिलहाल टाल दिया गया है। खामेनेई की मौत इजरायल के शुरुआती हमलों में हुई थी और अब सुरक्षा हालात के कारण उनके अंतिम संस्कार की तारीख आगे बढ़ा दी गई है।