ईरान ने उन खबरों का खंडन कर दिया है, जिसमें ऐसा कहा जा रहा था कि वो अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद कर देगा। खबर आई थी कि ईरान ने अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद करने की बात कही है। Sky News Arabia ने ईरान के उप विदेश मंत्री के हवाले से बताया कि अगर अमेरिका कोई संतोषजनक विकल्प पेश करता है, तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने के लिए तैयार है।
हालांकि, आधिकारिक तौर पर ईरान की तरफ से फिलहाल ऐसा कोई बयान नहीं आया है। न ही कोई फाइनल एग्रिमेंट हुआ है। बल्कि इसे एक कंडीशनल ऑफर या अमेरिका को बातचीत की मेज पर लाने का एक संकेत माना जा रहा है।
अगर ऐसा समझौता होता है, तो मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग का अंत नजदीक होगा और साथ ही वैश्विक राजनीति में भी बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
मध्य-पूर्व में तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया। इस ऑपरेशन को “Operation Epic Fury” नाम दिया गया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हमला उस समय हुआ, जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बैकचैनल बातचीत चल रही थी। इन बातचीत में ओमान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था, लेकिन बातचीत सफल नहीं हो सकी।
बातचीत के बीच ही हुआ हमला
ईरान का कहना है कि उसने अमेरिका के साथ बातचीत इसलिए शुरू की थी ताकि परमाणु विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके। हालांकि तेहरान के अनुसार उसे पहले से शक था कि वॉशिंगटन की मंशा साफ नहीं है।
ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि तय समय सीमा पूरी होने से पहले ही उन पर हमला कर दिया गया।
बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई
28 फरवरी को शुरू हुए इस अभियान में अमेरिकी मिसाइलों, ड्रोन और इजरायली लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। हमले में तेहरान समेत कई शहरों में सैन्य ठिकानों, मिसाइल लॉन्च साइट्स और कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया।
बताया जा रहा है कि इस दौरान ईरान के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को भी टारगेट किया गया, जिसमें सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
परमाणु कार्यक्रम बना बड़ा कारण
अमेरिका और इजरायल का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी मिसाइल क्षमताओं को रोकने के लिए की गई। दोनों देशों का दावा है कि ईरान की गतिविधियां क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थीं।